अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के साथ जीवन

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के साथ जीवन

” निःसंदेह अल्लाह तआला रहमान और रहीम है “

अल्लाह तआला की ज़ात हमारी माओं से अधिक हम पर दयालू है,नबी ने अपने बच्चे को दूध पिलाने वाली माँ की ओर इशारा करते हुये यह कहाः «इस औरत के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है क्या यह अपने बच्चे को आग में झोंक सक्ती है,हम ने कहाः नहीं वह अपने बच्चे को आग में नहीं झोंक सक्ती,तो आप ने फरमायाः यह औरत जिस तरह अपने बच्चे पर मेहरबान है अल्लाह तआला अपने बंदों पर इस से अधिक दयालू है» (बुखारी).

” निःसंदेह अल्लाह तआला रहमान और रहीम है “

अल्लाह तआला संपूर्ण संसार पर दया करता है,और उस के पास वह दया भी है जो उस के मोमिन बंदों के लिये विशेष है।

” निःसंदेह अल्लाह तआला रहमान और रहीम है “

अल्लाह तआला की ज़ात हमारी माओं से अधिक हम पर दयालू है,नबी ने अपने बच्चे को दूध पिलाने वाली माँ की ओर इशारा करते हुये यह कहाः

«इस औरत के बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है क्या यह अपने बच्चे को आग में झोंक सक्ती है,हम ने कहाः नहीं वह अपने बच्चे को आग में नहीं झोंक सक्ती,तो आप ने फरमायाः यह औरत जिस तरह अपने बच्चे पर मेहरबान है अल्लाह तआला अपने बंदों पर इस से अधिक दयालू है।» (बुखारी).

”निःसंदेह अल्लाह तआला रहमान और रहीम है“

अल्लाह तआला संपूर्ण संसार पर दया करता है,और उस के पास वह दया भी है जो उस के मोमिन बंदों के लिये विशेष है। {और अल्लाह मुसलमानों पर बड़ा रहम करने वाला है“।}[अल अहज़ाबः 43].

”निःसंदेह अल्लाह तआला रहीम है“

उस की रहमत का तक़ाज़ा है कि उस ने मुहम्मद को संपूर्ण संसार के लिये रहमत की शक्ल में इन्सानियत के लिये मार्गदर्शक,और उन की दीनी व दुनियवी हितों का रक्षक बना कर भेजा।

”निःसंदेह अल्लाह तआला रहीम है“

उस की रहमत को उस के अतिरिक्त कोई रोकने वाला नहीं और न ही उस के अतिरिक्त कोई भेजने वाला है। {अल्लाह जो दया लोगों के लिये खोल दे तो उस का कोई बंद करने वाला नहीं,और जिस को बंद कर दे उस के बाद उस को कोई शुरू करने वाला नहीं,और वही ज़बरदस्त हिक्मत वाला है“।}[फातिरः 2].

”निःसंदेह अल्लाह तआला रहमान और रहीम है“


अल्लाह तआला वह्हाब और जव्वाद है..

निःसंदेह अल्लाह तआला वह्हाब और जव्वाद है..

ऐ नेमतें देने वाले... ऐ उम्मीदो को बाँध रखने वाले... ऐ एहसान करने वाले.

मुझे प्रसन्नता दे... मुझे शांति दे... मुझे खुशी और प्रेम अता कर..

हम पर एहसान और करम कर,तू फज़्ल, उदारता और करम वाला है.. {और हमें अपने पास से रहमत अता कर,बेशक तू ही सब से बड़ा दाता है“।}[आले इमरानः 8].

«बेशक अल्लाह तआला दानशील है दानशीलता और अच्छे स्वभाव को पसंद करता है और बुरे व्यवहार को नापसंद करता है» (त्रिमिज़ी).

”अलवह्हाब“

जिसे चाहता है देता है और जिसे चाहे मना कर देता है.

”अलजव्वाद“

अल्लाह के देने की कोई हद नहीं है,और उस के एहसान को कोई रोक नहीं सकता,वह किसी चीज़ को कहता हैः {हो जा पस वह हो जाती है“। अल बक़राः117}[नामों और उस की विशेषताओं का].

”अल वह्हाब“

वह हिस्सी और आँतरिक(मानवी) जीविका देता है और अपने करम व एहसान से खूब देता है.

अल्लाह तआला अपने बंदे के दिल में जो अच्छे खयालात,लाभदायक बातें, ज्ञान, हिदायत,तौफीक़,खुशी डालता है और उस की दुआओं को क़बूल करता है,इन सब चीज़ों का तअल्लुक़ आँतरिक (मानवी) रोज़ी से है जिसे अल्लाह तआला ने अधिक लोगों को दे रखा है।

”अल वह्हाब“

दे या न दे,ऊँचा करे या अवंधे मुंह गिरा दे,और बराबर एहसान करे,या उसे खतम कर दे,उसी के हाथ में हर प्रकार की भलाई है,बेशक वह हर चीज़ पर शक्तिमान है।

बेशक अल्लाह तआला अलवह्हाब और अलजव्वाद है..


अल्लाह ताला अलवासे है..

अल्लाह ताला अलवासे है..{अल्लाह बहुत ताक़त वाला जानने वाला है“।}
[अल बक़राः 115].

” अलवासे “..

वह जव्वाद अर्थात दानशील है,उस की दानशीलता हर एक प्रश्न के लिये काफी है।

” अलवासे “..

अल्लाह तआला अपनी विशेषताओं में संपूर्ण है... अपने नामों में महान है उस की प्रशंसा को मापा नहीं जा सकता,वह कुशादा महानता,बादशाहत,सलतनत,उदारता और अधिक करम व एहसान का मालिक है।

” अलवासे “..

संपूर्ण सृष्टि को अपने ज्ञान, दान, रक्षा, निगरानी,और तदबीर से घेरे हुये है।

” अलवासे “..

अल्लाह ताला की ज़ात सब आवाज़ों को सुनती है और अनेक जु़बानों के कारण उसे मुग़ालता नहीं होता।

” अलवासे “..

अल्लाह तआला ने अपने बंदों के लिये उपासना को सरल कर दिया है,दीन को उन के लिये आसान बना दिया है,और उस ने बंदों को अपनी दया से ढँाप लिया है।

बेशक अल्लाह तआला अल वासे है..


अल्लाह तआला अल वदूद है..

बेशक अल्लाह तआला अल वदूद है.. {और वह बड़ा माफ करने वाला और बहुत प्रेम करने वाला है“।}[अल बुरूजः 14].

अल्लाह तआला अपने बंदों से मुहब्बत करने वाला है,उन से मुहब्बत करता है,उन्हे अपने निकट करता है, उन्हें प्रसन्न करता है,और उन से प्रसन्न होता है.. {अल्लाह उन से प्रेम करता है और ये अल्लाह से प्रेम करते हैं“।}[अल माइदाः 54].

अल्लाह तआला उन्हें लोगों की मुहब्बत प्रदान करता है,फिर लोग उस सेे मुहब्बत करने लगते हैं और उन की बातें स्वीकारते हैं।

”अलवदूद“..

अल्लाह तआला क़रीब है अपने बंदों से, वह अपने बंदो से मुहब्बत करता है और उन के लिये भलाई चाहता है।

”अलवदूद“..

अल्लाह के बंदे अल्लाह तआला से मुहब्बत करते हैं और उस से मिलने के इच्छुक हैं,और हदीस में हैः «जो व्यक्ति अल्ला तआला से मुहब्बत करेगा वह अल्लाह तआला से मिलने का शौक़ीन होता है» (बुखारी).

”अलवदूद“.. अल्लाह तआला तुम्हें इस बात का आदेश देता है कि तुम अपने दिल को पविन्न रखो कीना कपट और नफरत से दिल को दूर रखो अथवा कीना कपट की गंदगी को पानी से धुल दो और हसद की आग को प्यार व मुहब्बत के ओले से बुझा दो।

बेशक अल्लाह तआला अल वदूद है..

”अलवदूद“... वह ज़ात है जो अपने नबियों,रसूलों,और उन की पैरवी करने और उन से मुहब्बत करने वालों से मुहब्बत करती है,अल्लाह तआला की ज़ात उन के निकट हर चीज़ से अधिक प्रिय है,उन के दिलों मंे अल्लाह की मुहब्बत भरी है और उन की जु़बानों पर अल्लाह तआला का जि़क्र है और उन के दिल प्यार,इख्लास,और हर एतबार से उस की ओर रूजू हो कर आस लगाये हुये हैं।

ल्लाह तआला अल हय्य और अल क़य्यूम है..

{अल्लाह वह है जिस के सिवाय कोई सत्य माबूद नहीं,जो जि़ंदा है और सभी का रक्षक है“।}
[आले इमरानः 2].

बेशक अल्लाह तआला अल क़य्यूम है.. {अल्लाह वह है जिस के सिवाय कोई सत्य माबूद नहीं,जो जि़ंदा है और सभी का रक्षक है“।}[आले इमरानः 2].

”अल हय्य“

संपूर्ण जीवन वाला,उस को किसी की आवश्यक्ता नहीं,जब कि दूसरों को उस की आवश्यक्ता है... और अल्लाह तआला की ज़ात के अतिरिक्त हर चीज़ हलाक होने वाली है।

”अल क़य्यूम“..

वह ज़ात जो स्वयं क़ायम और सब से बेनियाज़ है।

”अल क़य्यूम“..

हर नफ्स के करतूतों का ज्ञान रखने वाला,उन के आमाल,हालतों,कथनांे,उन की अच्छाइयों और उन की बुराइयों का रक्षक है,जो उन के अमलों की बुनियाद पर उन्हें प्रलोक में बदला देने वाला है।

”अल क़य्यूम“..

बंदों के आमाल की गिनती रखने वाला।

”अल क़य्यूम“..

अपने हर मखलूक़ के जीवन,उन की जीविका,उन के अहवाल और उन के मामलों की तदबीर का जि़म्मेदार।

”अल हय्य अल क़य्यूम“

बिना निधन के बाक़ी रहने वाला।

”अल हय्य अल क़य्यूम“

संपूर्ण जीवन वाला स्वयं अपने वजूद को क़ायम रखने वाला। आसमान और ज़मीन वालों के लिये क़ायम करने वाला,उन की रोज़ी और दूसरे तमाम अहवाल की तदबीर करने वाला। ”अल हय्य “ संपूर्ण ज़ाती विशेषताओं वाला,और अल क़य्यूम“ः दूसरी संपूर्ण विशेषताओं वाला।

अल्लाह अल जब्बार है..

बेशक अल्लाह तआला अल जब्बार है.. {वही अल्लाह है जिस के सिवाय कोई पूज्य नहीं,मालिक,बहुत पाक,सभी बुराइयों से पविन्न,शांति अता करने वाला,रक्षक,ग़ालिब,ताक़तवर,महान,पाक है अल्लाह उन चीज़ों से जिन्हें ये उस का साझीदार बनाते हैं“।}[अल हश्रः 23].

”अलजब्बार“...

टूटे हुये को जोड़ने वाला,कैदी की सहायता करने वाला,मुहताज को बेनियाज़ करने वाला,भटकने वालों को सुधारने वाला, गुनहगारों के गुनाहों को क्षमा करने वाला,अज़ाब दिये जाने वालों को आज़ाद करने वाला,और मुहब्बत करने वालों और विनम्रों के दिलों को तसल्ली देने वाला।

”अल जब्बार“...

वह ज़ात जो सब से ऊपर है और उस की नेमतें हर चीज़ से बुलंद हैं।

”अल जब्बार“...

वह ज़ात जिस के सामने हर चीज़ पस्त और झुकी हुयी है,और किसी एक मामले के कारण वह दूसरे मामले से बे खबर नहीं है।

”अल जब्बार“...

स्लतनत,बादशाहत,हुकूमत और महानता एवं बुज़ुर्गी वाला।

”अलजब्बार“...

उस के सामने बड़े बड़े ज़ालिम झुकते हैं और महान लोग माथा टेकते हैं और बादशाह और बड़े बड़े लोग उस के सामने आजज़ी ज़ाहिर करते हैं और उस के सामने बड़े बड़े मुज्रिम और सर्कश टूट जाते हैं।

बेशक वह अल्लाह तआला अल जब्बार है..

”अलजब्बार“ अर्थात वह बुलंद व बाला है अथवा इस का अर्थ ग़ालिब,मेहरबान के भी हैंः अर्थात टूटे हुये दिलों को जोड़ने वाला और कमज़ोर,आजिज़ को तसल्ली देने वाला और जो उस की ओर पनाह ढूँडे उसे पनाह देने वाला है।

अल्लाह तआला अल जमील है ..

बेशक अल्लाह तआला अल जमील है।

ऐ अल्ल्लाह हम तुझ से तेर मुबारक चेहरे को देखने की लज़्ज़त के सवाली हैं और तेरी मुलाक़ात के शौक़ीन हैं।

” अल जमील “

अल्लाह के अधिक अच्छे अच्छे नाम और उत्तम विशेषतायें हैं।

” अल जमील “

संपूर्ण नामों और पूर्ण विशेषताओं की खूबसरती बल्कि निपेक्ष पूर्णता की सुंदरता अल्लाह तआला के लिये है। {और तुम्हारे रब के कलाम सच्चे क़ौल और इन्साफ में पूरा हो गये“।}[अल अनआमः 115].

वह ज़ात जिस ने हर चीज़ को बड़े निराले ढाँचे में पैदा किया है।

” अल जमील “

संसार की सुंदरता अल्लाह की महिमा एवं सुंदरता का प्रमाण है,अल्लाह तआला की सुुंदरता बुद्वियांे में नहीं आसकती,और न ही किसी की समझ उसे बयान कर सकती है,नबी ने फरमायाः «मैं तेरी वैसी प्रशंसा नहीं कर सकता जैसी प्रशंसा का तू हक़दार है,तू वैसे ही है जैसा तू ने स्वयं अपने बारे में बयान किया है।» (मुस्लिम)

” अल जमील “

अल्लाह तआला को संसार की सुंदरता, स्वभाव की सुंदरता और अच्छे गुमान की सुंदरता प्राप्त है।

ऐ सुंदरता को प्रिय रखने वाली सुंदर ज़ात,हमारे दिलों को ईमान की रोशनी से सुंदर बनादे,हमारे स्वभाव,हमारे दिलों और हमारी ज़ाहिरी शक्लों को संुदर बना दे।

बेशक अल्लाह तआला अल जमील है।


अल्लाह तआला,अल अलीम,अल खबीर और अल मुहीत.. है।

बेशक अल्लाह तआला अल अलीम,अल खबीर और और अल मुहीत.. है।

” अल अलीम,अल खबीर,अल मुहीत“

वह ज़ात जिस के ज्ञान ने ज़ाहिर व रहस्य,पोशीदा व घोषड़ा की हुयी,यक़ीनी व मुहाल और संभावित चीज़ों अथवा निचली और ऊपरी दुनिया को,और भूत,वर्तमान और भविष्य को घेरे हुये है,कोई भी चीज़ उस के ज्ञान से छुपी नहीं है।

”अल अलीम,अल खबीर“

{बेशक अल्लाह ही के पास क़यामत का इल्म है,वही बारिश करता है और माँ के गर्भ में जो है उसे जानता है,कोई नहीं जानता कि कल क्या कुछ कमायेगा,न किसी को यह मालूम है कि किस धरती पर मरेगा,याद रखो अल्लाह ही पूरे ज्ञान वाला और सच्चाई जानने वाला है“।}[लुक़मानः 34].

”अल्लाह तआला अल अलीम और अल मुहीत है“

{वह आसमानों और ज़मीन की सभी चीज़ों का ज्ञान रखता है और जो कुछ तुम छिपा रखो और जो ज़ाहिर करो वह जानता है,अल्लाह तो सीनों तक की बातों को जानने वाला है“।}[अŸाग़ाबूनः 4].

अल्लाह तआला हर चीज़ को जानता है.. {अल्लाह वह है जिस ने सात आकाश बनाये और उसी की तरह धरती भी,उस का हुक्म उन के बीच नाजि़ल होता है ताकि तुम जान लो कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है,और अल्लाह ने हर चीज़ को अपने ज्ञान की परिधि मंे घेर रखा है“।}¿अŸालाक़ः 12].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और अल्लाह ने हर चीज़ को अपने ज्ञान की परिधि मंे घेर रखा है“। {अŸालाक़ः 12}[अŸालाक़ः 12].

” बेशक अल्लाह तआला अल अलीम,अल खबीर और अल मुहीत है“


अल्लाह तआला अल क़रीब है..

बेशक अल्लाह तआला अल क़रीब है..

हे वह ज़ात जो हर उस व्यक्ति के क़रीब है जो उस से माँगता है... हे वह ज़ात जो हर उस व्यक्ति के क़रीब है जो उस से आशा करता है।

हे वह ज़ात जो हर उस व्यक्ति के क़रीब है जो उस से माँगता है...हे वह ज़ात जो हमारे गले के नस से भी अधिक क़रीब है।

हे क़रीब ज़ात तू अपनी उनसियत और अपने कलाम के ज़रिये हमारे ऊपर एहसान कर...

{और जब मेरे बंदे मेरे बारे में आप से सवाल करें तो मैं क़रीब हूँ“।}[अल बक़राः 186].

” अल क़रीब “

बुलंद होने के बावजूद अपने ज्ञान और जानकारी के ज़रिये क़रीब रहने वाली ज़ात।

” अल क़रीब “

हर उस व्यक्ति से अल्लाह तआला क़रीब है जो उस से माँगे,वह दया करता है,उम्मीदें पूरी करता है,दुख दूर करता है और परेशान हाल की दुआ क़बूल करता है।

” अल क़रीब “

हर उस व्यक्ति से अल्लाह तआला क़रीब है जो उस से तोबा करे,उस से लव लगाये,अल्लाह तआला गुनाह माफ करता है और तोबा स्वीकार करता है।

” अल क़रीब “

जिन इबादतों के ज़रिये बंदा अल्लाह तआला की निकटता ढूँडता है उसे वह स्वीकारता है और बंदा जिस प्रकार अल्लाह तआला के निकट आता है उसी प्रकार अल्लाह तआला भी बंदे के निकट आता है।

” अल क़रीब “

अपने बंदो के हालात से परिचित है,वह अपने ज्ञान और उन्हें घेरने के कारण उन से क़रीब है,और कोई भी चीज़ उस से छुपी नहीं है।

” अल क़रीब “

अपनी दया व करम,रक्षा और सहायता एवं ताईद से क़रीब है,और यह निकटता उस के दोस्तों अर्थात मोमिनांे के साथ खास है।

” अल क़रीब “

अंजाम के एतबार से उस के सब बंदे उसी की ओर लौटते हैं।

{और हम उस इन्सान से तुम्हारे मुक़ाबले में ज़्यादा क़रीब होते हैं“।}[अल वाके़आः 85].ß अल क़रीब “

रूह उस की निकटता से मानूस होते हैं और उस के जि़क्र से आबाद रहते हैं।

बेशक अल्लाह तआला अल क़रीब है..

”अल क़रीब “.. हर एक व्यक्ति से अपने ज्ञान,अनुभव,निगरानी,देखने और उसे घेरे हुये होने के कारण क़रीब है।

अल्लाह तआला अल मुजीब है...

बेशक अल्लाह तआला अल मुजीब है...

{बेशक मेरा रब निकट और तोबा क़बूल करने वाला है“।}[हूदः 61].

” अल मुजीब “

जब बंदे उस का वसीला माँगें,उस से प्रार्थना करें और शरई ऐतबार से उस से जायज़ चीज़ें माँगें तो वह देता है,और उसी ने अपने बंदों को दुआ करने का आदेश दिया है और दुआ क़बूल करने का उन से वादा किया है।

” अल मुजीब “

क़ैदी क़ैदखाने में,डूबने वाला समुद्र में, मुहताज अपनी मुहताजी में,यतीम अपनी यतीमी में,बीमार अपनी बीमारी में,बाँझ अपने बाँझपन में उस से उम्मीद लगाये तो वह उन सब को देता है,उन की दुआयें क़बूल करता है,अनुदान करता है और उन्हें सेहत व तंदुरुस्ती देता है।

” अल मुजीब “

” अल मुजीब “... दुआ करने वाले जो भी हांे जहाँ भी हों और जिस हाल में हांे उन की दुआयें स्वीकारता है।

परेशान हाल की दुआयें क़बूल करता है.. {बेबस की पुकार को जब कि वह पुकारे कौन क़बूल कर के तकलीफ को दूर कर देता है“।}[अन्नमलः 62].

क़बूलियत के अधिक क़रीब उस बंदे की दुआ होती है जो उस के नामों और उस की विशेषताओं के ज़रिये उस से माँगता है,कितने ऐसे हैं जिन्हों ने जेलों में उस से प्रार्थना की तो अल्लाह तआला ने उन्हें जेल से रिहाई दिला दी,कितने ऐसे हैं जिन्हों ने समुद्रों में उस से उम्मीद बाँधी तो उस ने उन्हें शांति के साथ किनारे पहुँचा दिया,ऐसे लोग भी हैं जिन्हांे ने मुहताजगी में उसे याद किया तो अल्लाह तआला ने उन्हें बेनियाज़ कर दिया और उन्हें अमन व शांति दे दी,वह अनाथ भी हैं जिन्हों ने अनाथ होने की हालत में उसे पुकारा तो उस ने उन्हंे अपनी निगरानी में रखा और अपने करम से उन्हें बड़ा कर दिया,वह बीमार भी हैं जिन्हों ने उस से आशा की तो उस ने उन्हें शिफा दे दी, और उन्हें तंदुरुस्ती अता कर

दी,और कितने ऐसे बाँझ हैं जिन्हों ने उस के सामने गिड़गिड़ा कार माँगा तो उस ने उन्हें अवलाद दे कर उन का सम्मान बढ़ा दिया ।

बेशक अल्लाह तआला अल मुजीब है...


अल्लाह तआला अन्नूर है..

बेशक अल्लाह तआला अन्नूर है..

{अल्लाह नूर है आकाशों का और धरती का“।}[अन्नूरः 35].

” अन्नूर “..

जिस ने अल्लाह का ज्ञान रखने और उस पर ईमान लाने वालों के दिलों को रोशन कर दिया,और उन के दिलों में हिदायत की रोशनी डाल दी।

” अन्नूर “..

जिस ने अपने नूर से अंधेरा खतम कर दिया,और आसमान और ज़मीन को रोशन कर दिया अवर अपनी ओर आने वालों के मार्गाें और उन के दिलों को चमका दिया ।

अल्लाह तआला अन्नूर है और,उस का हेजाब(परदा) भी नूर का है,अगर वह अपना हेजाब उठा ले तो उस के चेहरेे के नूर से जहाँ तक निगाह पहुँचे उस की मखलूक़ जल जायेगी।

बेशक अल्लाह तआला अन्नूर है..


अल्लाह तआला अल हकीम है..

बेशक अल्लाह तआला अल हकीम है.. {क्या अल्लाह सभी हाकिमों का हाकिम नहीं है?“}
[अŸाीनः 8].

” अल हकीम “

वह ज़ात जो सब चीज़ों को अपनी पकड़ में रखे और उन को बेहतर तरीक़े से अंजाम दे और अपने तक़दीर के फैसेलों के अनुसार उन चीज़ों को उन के मुनासिब स्थान पर रखे।

” अल हकीम “

सारे क़ानून और दस्तूर को उस ने अपनी बुद्धिमŸाा (हिकमत) ही की बुनियाद पर बनाया है,उस की ओर से बनाये हुये क़ानून अपने उद्देश्यों,उस के रहस्यों और उस के दुनियवी एवं उखरवी परिणामों के एतबार से महान बुद्धिमŸाा का पता देते हैं।

” अल हकीम “

अल्लाह तआला अपने फैसलों और तक़दीर में हिकमत वाला है,वह ज़ात मुहताज के लिये मुहताजगी,बीमार के लिये बीमारी,और कर्ज़दार की परेशानी और तंगदस्ती के फैसलों में हिकमत वाली है,उस के रचने में दोष प्रवेश नहीं कर सकता और न ही उस के शब्दों और कर्माें में कोई कमी और अस्पष्टता आ सकती है,अल्लाह तआला महान ज्ञान एवं हिकमत वाला है।

” अल हकीम “

अपने बंदों में ज्ञान,हिकमत संयम और संजीदगी डालता है,और हर काम को उस के ठीक स्थान पर रखता है।

अल्लाह तआला सब हाकिमों से अधिक हिकमत वाला है,इस कायनात (संसार) की हर चीज़ उसी के आदेश के अधीन है, वही जिसे चाहता हलाल करता है और जिसे चाहता है हराम करता है,हुक्म केवल उसी का चलता है,और दीन वही है जिस का उस ने आदेश दिया और जिस से उस ने मना किया,उस के आदेश को कोई पीछे डालने वाला नहीं,और न ही उस के फैसले एवं तक़दीर को कोई ठुकराने वाला है।

” अल हकीम “

वह किसी पर जु़ल्म नहीं करता... वह हुक्म देने,मना करने और अपनी ओर से दी जाने वाली खबरों में न्याय करने वाला है।

बेशक अल्लाह तआला अल हकीम है..


अल्लाह तआला अल मलिक अल मालिक और अल मलीक है..

बेशक अल्लाह तआला अल मलिक है.. {वह मालिक और अधिक पाक है“।}
[अल हश्रः 23].

”अल मलिक“

वह महानता और बड़ाई वाला है,बंदों के मामलों की उपाय और तसर्रुफ करता है,सब बंदे उस के गुलाम और उस के मुहताज हैं,वह उन का बादशाह और मालिक है।

” अल हकीम “ .. वही ज़ात है जिस के लिये पैदा करने वाली विशेषता और हुक्म में बुलंद हिक्मत है,वह किसी चीज़ को बिना लाभ के पैदा नहीं करता,और न किसी बात का बेकार में हुक्म देता है,पहले और बाद में उसी के लिये बादशाहत है। ” अल मलिक अल मालिक “ .. उसी के लिये हुकूमत व बादशाहत है,वही है जिस में बादशाहत की विशेषता पाई जाती है,और यह विशेषता महानता,बड़ाई गलबा और उपाय के अर्थ को शामिल है,वह जिस के लिये पैदा करने,हुक्म देने और बदला देने का पूरा इख्तियार है,उसी के लिये सब निचली और ऊपरी दुनिया है सब उसी के गुलाम,बंदे और उसी के मुहताज हैं।

उसी के लिये संपूर्ण बादशाहत है,जितने भी बादशाह और हाकिम हैं सब उस के गुलाम हैं,और आसमान व ज़मीन में जो भी भलाई है सब उसी के करम और देन से है। {उस की मिल्कियत में ज़मीन व आसमान की सभी चीज़ें हैं“।}
[अल बक़राः 255].

”अल मलिक“

वह बिना हिसाब व किताब देता है,बंदों को अधि प्रदान करता है,और इस से उस की बादशाहत में कोई कमी नहीं होती,और न एक चीज़ दूसरी चीज़ से उस को बेखबर रखती है,और सही हदीसे कु़दसी में हैः «..यदि तुम में से पहला और अंतिम व्यक्ति,इन्सान और जिन्नात एक पलेट फार्म पर खड़ें हो जायें और मुझ से माँगें,और मैं उन में से हर एक की मुराद पूरी कर दूँ तो उस से मेरे खज़ानों में उसी प्रकार कमी होगी,जिस प्रकार सूई को समुद्र में डाल कर निकालने से होती है।..» (मुस्लिम)

”अल मलिक“

वह जिसे चाहता है बादशाह बना देता है,अल्लाह तआला ने फरमायाः{आप कह दीजिये ऐ अल्लाह! हे सारी दुनिया के मालिक तू जिसे चाहे मुल्क दे और जिस से चाहे मुल्क छीन ले,और तू जिसे चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे ज़लील कर दे,तेरे ही हाथों में सारी ही भलाइयाँ है,बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है“।}[आले इमरानः 26].

”अल मलीक“

वह अपनी मखलूक़ का मालिक है,और लोक एवं प्रलोक में उन के मामलों में तसर्रुफ करता है,इस लिये बंदे उसी की चाह में रहंे और उसी की पनाह ढूँडें और उसी की ओर से मिलने वाली नेमतों की आशा करते हुये अनुरोध,प्रार्थना गिड़गिड़ा कर और पुकार कर अधिकतर माँगें।

बेशक अल्लाह तआला अल मलिक अल मालिक और अल मलीक है..


अल्लाह तआला अल कुद्दूस है..

बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है..

वह अपनी बुलंदी और और बड़ाई में मुक़द्दस है,उस की प्रशंसा अधिकतर है और उस की नेमतें महान हैं.. {वही अल्लाह है जिस के सिवाय कोई पूज्य नहीं,मालिक,बहुत पाक और सभी बुराइयों से आज़ाद है“।} [अल हश्रः 23].वह पाक,क़ुद्दूस ज़ात फरिश्तांे और जिब्रीले अमीन का स्वामी है... वह पाक ज़ात अलमलिक और अल कु़द्दूस है।

”अल कु़द्दूस अस्सलाम“ .. वह महान ज़ात हर प्रकार के अैब और कमी और मखलूक़ में से किसी की मुशाबहत से पाक है,वह हर अैब से पाक है और इस बात से भी पाक है कि उस की मखलूक़ में से कोई उस के क़रीब हो या कोई उस के कमालात में से किसी चीज़ की तरह हो।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है..ृ

अल्लाह तआला हर अैब और हर कमी से पाक है अथवा हर उस विशेषता से पाक है जो उस के शायाने शान नहीं है।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“

वह पूर्णता,सुंदरता और महिमा जैसी विशेषताओं से मुŸासिफ है,हर कमी और हर एक अैब से पाक है,उस जैसी न तो कोई चीज़ है और न ही कोई उस के समकक्ष है,उस की पूर्णता के ऊपर कोई पूर्णता नहीं और न ही कोई उस के नामों और उस की विशेषताओं की बुलंदी को पहुंच सकता है।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“

वह ज़ात जिस की पविन्नता दिल बयान करते हैं और संपूर्ण आशायें उसी से जुड़ी हुयी हैं, और जु़बान उस की पविन्नता के गीत गाते हैं,अथवा हर समय उस की तस्बीह बयान करते हैं।

” बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“

वह बरकत,दानी,करम और प्रशंसा वाला है,उसी की ओर से बरकतें शुरू और खतम होती हैं,वह बरकत वाला है जो अपने बंदों को बरकत प्रदान करता है,और अपनी इच्छा अनुसार अपनी दी हुयी चीज़ों में बरकत डाल देता है।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“


अल्लाह तआला अस्सलाम है..

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है..

अल्लाह तआला अस्सलाम है और उसी से शांति है कोई व्यक्ति उस की ओर से मिलने वाली शांति के बिना शांति से नहीं रह सकता और कोई भी कामयाबी उस की ओर से मिलने वाली तौफीक़ के बिना पूरी नहीं हो सकती है।

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है

वह हर कमी और हर अैब से महफूज़,और संसार को मुसीबतों और आफतों से बचाने वाला है

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है

अल्लाह तआला की विशेषतायें सृष्टि समान नहीं हैं, वह हर प्रकार की कमी और कोताहियों से संरक्षित हैं,उस का ज्ञान पूर्ण और संरक्षित है,उस का न्याय हर चीज़ को घेरे हुये अथवा संरक्षित है,उस का फैसला संरक्षित है,उस की कारीगरी संरक्षित है,वह अस्सलाम है,उसी से शांति है वह बरकत,महिमा और सम्मान वाला है।

अल्लाह तआला ने अपने बंदों के लिये दोनों संसार में शांति लिख दी है। {इब्राहीम पर सलाम हो“।}[अस्साफ्फातः 109].

{मूसा और हारून पर सलाम हो“।}
[अस्साफ्फातः 120].

{और पैग़म्बरों पर सलाम हो“।}
[अस्साफ्फातः 181].

और प्रलोक में अल्लाह तआला कहेगाः {सलामती और अमन के साथ उस में दाखिल हो जाओ“।}[अल हिज्रः 46].

अस्सलाम

संपूण शांति जिस के पश्चात कोई डर नहीं और संपूर्ण क्षमा जिस के बाद कोई भय नहीं।

वही शांति है और उसी से शांति है।

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है..


अल्लाह तआला अल हक्क़ है..

बेशक अल्लाह तआला अल हक्क़ है..

{यह इस लिये कि अल्लाह ही हक़ है“।}
[अल हज्जः 6].

”अल्लाह तआला अल हक्क़ है“..

वह अपनी ज़ात और विशेषताओं में सत्य है,वह पूर्ण सिफात और विशेषताओं वाला है,उस का वजूद ज़ाती है और उसी के वजूद से हर चीज़ का वजूद है,वही है जो अपनी महिमा,सुंदरता,और पूर्णता के साथ हमेशा से है और हमेशा रहेगा,इसी प्रकार उस का उपकार हमेशा से जाना पहचाना है और हमेशा जाना पहचाना रहेगा।

”अल्लाह तआला अल हक्क़ है“..

उस की बात,उस का काम,उस से मुलाक़ात,उस के रसूल,उस की किताबें,उस का दीन,और उस की अकेले उपासना सब सत्य और हक़ हैं,और उस की ओर मंसूब होने वाली हर चीज़ हक़ है। {यह सब इस लिये कि अल्लाह ही सच है,और उस के सिवाय जिसे भी यह पुकारते हैं वे झूटे हैं, और बेशक अल्लाह बुलंद और बड़ाई वाला है“।}[अल हज्जः 62].

बेशक अल्लाह तआला अल हक्क़ है..


ल्लाह तआला अल मोमिन और अल मुहैमिन है..

बेशक अल्लाह तआला अल मोमिन और अल मुहैमिन है..

{वही अल्लाह है जिस के सिवाय कोई पूज्य नहीं,मालिक,बहुत पाक और सभी बुराइयों से आज़ाद है,शांति अता करने वाला और रक्षक है“।}
[अल हश्रः 23].

”अलमोमिन“..

जो वह्य के ज़रिये अपने बंदों और अपनी मखलूक के बीच शांति फैलाता है। {और उन्हें डर मंे अमन अता किया“।}[कु़रेशः 4].

”अलमोमिन“...

शांति देने वाला,रक्षा करने वाला है और अपने मखलूक़ के सारे अमल की खबर रखने वाला है।

”अलमोमिन“...

वह बदले में कोई कमी नहीं करता,और न सज़ा में कोई ज़्यादती करता है,वह दया,फज़्ल,अच्छाई,और दान के अधिक योग्य है।

”अल मुहैमिन“

वह अपने बंदों का रक्षक है वह उन पर ग़ालिब है और उन्हें नियंन्नित किया,उन की देख रेख करता है,उन के करतूतों और हालतों को जानता है,उस ने बंदों के हर एक चीज़ को घेर रखा है,हर मामला उस के लिये सरल और हर चीज़ उस की आवश्यक है...

{उस जैसी कोई चीज़ नहीं वह सुनने वाला देखने वाला है“}[अश्शूराः 11].

बेशक अल्लाह तआला अल मोमिन और अल मुहैमिन है..

” अल मोमिन “.. वह ज़ात जिस ने अपनी पूर्ण विशेषताओं और पूर्ण महिमा और सुंदरता के कारण स्वयं की प्रशंसा की है,और जिस ने अपने मैसंेजर को भेजा और दलाइल एवं प्रमाण के साथ किताबें उतारी,और रसूलों के लाये हुये पैग़ाम के सत्य होने और स्वयं रसूलों की सत्यता पर प्रमाणित दलीलों और चिन्हांे से उन की सत्यता साबित की। ”अल मुहैमिन“ वह छुपे हुये मामलांे और सीनांे में छुपी हुयी चीज़ों की खबर रखता है,उस ने अपने ज्ञान से हर चीज़ को घेर रखा है।

अल्लाह तआला अल अफ्व,अल ग़फूर और अल ग़फ्फार है..

बेशक अल्लाह तआला अल अफ्व और अल ग़फ्फार है.. {बेशक अल्लाह तआला माफ करने वाला अधिक क्षमा करने वाला है“।}[अल हज्जः 60].

बेशक अल्लाह तआला अल अफ्व अल ग़फूर और अल ग़फ्फार है..

वह ज़ात जो हमेशा हमेश से अपनी क्षमा से जानी पहचानी जाती है,और जिस में अपने बंदों को माफ करने और उन्हें दरगुज़र करने की विशेषता पाई जाती है,हर एक उस की क्षमा और माफी की मुहताज है जैसे हर एक चीज़ उस की दया और करम की मुहताज है।

हे वह ज़ात जिस ने उस व्यक्ति के लिये क्षमा करने का वादा किया है जो क्षमा के कारणों को अपनाये,अल्लाह तआला ने फरमायाः {और बेशक मैं उन्हें माफ कर देने वाला हूँ जो माफी माँगें,ईमान लायंे,नेकी के काम करें और सीधे रास्ते पर भी रहें“।}[ताहाः 82].

हे क्षमा करने वाले हम तुझ से इस बात के सवाली हैं कि तू हमें सच्ची तोबा की तौफिक दे, जिस के बाद हम गुनाहों से दूर हो जायें, और उसे छोड़ दें,और जो कुछ हमने ग़लत और पाप किया है उस पर शर्मिंदा हैं,और तेरी फरमाबरदारी करने का और तेरी नाफरमानी न करने का पुखता इरादा कर लें,हे क्षमा करने वाले हमें क्षमा कर दे।

हे अल्लाह तू क्षमा करने वाला है,क्षमा को प्रिय रखता है,तू हमें भी क्षमा कर दे... ऐ अल्लाह तू ने हमें खबर दी है कि तू अधिक क्षमा करने वाला और अधिक दयालू है... {मेरे बंदों को खबर कर दो कि मैं बहुत माफ करने वाला और बहुत रहम करने वाला हूँ“।}[अल हिज्रः 49].

तो हम पर कृपा कर,और ऐ क्षमा करने वाले हमें क्षमा कर दे।

बेशक अल्लाह तआला अल अफ्व अल ग़फूर और अल गफ्फार है..


अल्लाह तआला अŸाव्वाब है ..

बेशक अल्लाह तआला अŸाव्वाब है .. {बेशक अल्लाह तआला बहुत ज़्यादा तोबा क़बूल करने वाला और रहम करने वाला है“।}[अŸाोबाः 118].

” अŸाव्वाब “

वह ज़ात जिस ने अपने बंदों के लिये उन पर करम,उपकार और एहसान करते हुये तोबा को मश्रू किया, बल्कि इस के अतिरिक्त अधिक पुरस्कार का वादा किया,अर्थात उन के बुराइयों को नेकियों में बदल दिया जायेगा।

” अŸाव्वाब “

वह ज़ात जो अपने बंदों को तोबा पर क़ायम रखती है,और फर्ज़ की अदायगी में उन की सहायता करती है।

” अŸाव्वाब “

वह ज़ात जो अपने बंदों को तोबा की तौफीक़ देती है,और उन्हें तोबा की इच्छा दिलाती है,और फिर तोबा की बुनियाद पर स्वयं उन से मुहब्बत करने लगती है।

” अŸाव्वाब “

जो हमेशा अपने बंदे की तोबा क़बूल करता है और तोबा करने पर उन्हें सवाब देता है और बंदों के दरजों को बुलंद करता है और उन के गुनाहों को मिटाता है,क्या ही महान है अल्लाह और किस क़दर उस की शान बुलंद है।

बेशक अल्लाह अŸाव्वाब है..

” अŸाव्वाब “ जो हमेशा तोबा करने वालों की तोबा क़बूल करता है और गुनहगारों के गुनाहों को क्षमा करता है,हर वह व्यक्ति जो अल्लाह तआला से सच्ची तोबा करे अल्लाह तआला उस की तोबा क़बूल करता है,वह तोबा करने वालों को पहले तोबा की तौफीक़ देता है और उन के दिलों को अपनी ओर मुतवज्जेह करता है,फिर तोबा करने के बाद उन की तोबा को क़बूल करते हुये उन की गलतियों को क्षमा करता है.

अल्लाह तआला अलवाहिद और अल अहद है..

बेशक अल्लाह तआला अलवाहिद और अल अहद है..

हे वह ज़ात जिस की ज़ात अकेली है और जो अपने नामों और विशेषताओं के एतबार से अकेला है।

हम तुझ से इख्लास,मुहब्बत और महत्वाकांक्षा (पुखता इरादा) के सवाली हैं ऐ अकेली और बेनियाज़ ज़ात।

”अल अहद“

वह अपनी ज़ात और अपने नामों एवं विशेषताओं में अकेला है,उस का न तो कोई समकक्ष है न कोई उस के मुशाबेह है और न ही उस जैसी कोई चीज़ है। {क्या तेर इल्म में उस का हमनाम कोई दूसरा भी है“।}[मरयमः 65].

”अल अहद“

वह इबादत के योग्य और उलूहियत में अकेला है,इस लिये अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य उपास्य नहीं, और हर प्रकार की इबादत चाहे वह छोटी हो या बड़ी उस के अतिरिक्त किसी की नहीं की जायेगी।

”अल अहद“

वह एक है जिस का इरादा किया जाता है, और वह एक पालनहार है जिस की उपासना की जाती है,दिलों की गहराइयों ने इस की गवाही दी और गै़ब की खबर रखने वाले अल्लाह से निगाहें जुड़ गईं।

”अल वाहिद अल अहद“

अल्लाह तआला ने अपने बंदों को अपनी तौहीद पर पैदा किया है,उस का कोई साझी नहीं,कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जिस ने अल्लाह के अतिरिक्त की ओर धियान लगाया हो और वह कामयाब होगया हो,और न ही कोई ऐसा बंदा है जिस ने अल्लाह के अतिरिक्त की इबादत की हो और वह खुश भी हो,और न ही कोई बंदा ऐसा है जिस ने उस का साझी बनाया और वह सफल रहा हो।

बेशक अल्लाह तआला अल वाहिद और अल अहद है.


ल्लाह तआला अस्समद है..

बेशक अल्लाह तआला अस्समद है..

{कह दीजिये कि वह अल्लाह एक है,अल्लाह बेनियाज़ है“।}[अल इख्लासः 1-2].

”अस्समद“...

अपने नामों और विशेषताओं में संपूर्ण है,उस में किसी प्रकार की कोई कमी और कोताही प्रवेश नहीं कर सकती।

”अस्समद“...

वह बेनियाज़ है उस के सब मुहताज हैं और वह किसी का मुहताज नहीं। {वह खिलाता है और खिलाया नहीं जाता“।}[अल अनआमः 14].

”अस्समद“

वह पालनहार,उपाय करने वाला,मालिक और तसर्रुफ करने वाला है।

” अल वाहिद अल अहद“ वह अल्लाह जो अपने तमाम पूर्णता में अकेला है,इस प्रकार कि इन पूर्णताओं में उस का कोई साझी नहीं,और बंदों पर यह अनिवार्य है कि अक़्ल के एतबार से,ज़ुबान के एतबार से और अमल के एतबार से अल्लाह तआला की यकताइयत को स्वीकारें,अर्थात वे अल्लाह तआला की निरपेक्ष पूर्णता और यकताइयत में अकेले होने को स्वीकार करें और हर प्रकार की इबादत का योग्य केवल उसी को जानें।

”अस्समद“

ज़रूरत के समय दिल उस की ओर मुतवज्जेह होते हैं तो वह उन्हें देता है, मना नहीं करता है,परेशानियों के समय दिल उसे पुकारते हैं तो वह उन की पुकार क़बूल करते हुये उन की परेशानियों को दूर करता है,उस से कटे हुये लोग जब उसे पुकारते हैं तो वह उन्हें जोड़ लेता है,और डरे हुये लोग उस का इरादा करते हैं तो वह उन्हें शांति देता है,और एकेश्वरवादी उस से आशा लगाते हैं तो वह उन की मुरादें पूरी करता है,दुखी लोग उस से प्रार्थना करते हैं तो वह उन्हे दुखों से मुक्ति देता है,और बंदे उस की ओर झुकते हैं तो अल्लाह तआला उन के मरतबे को ऊँचा करता है।

बेशक अल्लाह तआला अस्समद है..

”अस्समद“ वह ज़ात है जिस का इरादा संपूर्ण मखलूक़ अपनी ज़रूरतों,आवश्यक्ताओं और तमाम हालतों मे करती है,क्योंकि उसे अपनी ज़ात,अपने नामों,अपनी विशेषताओं और अपने कार्यों में हर प्रकार की पूर्णता प्राप्त है।

अल्लाह तआला अल अज़ीज़ है..

बेशक अल्लाह तआला अल अज़ीज़ है.. {और अल्लाह ग़ालिब हिक्मत वाला है“।}

[अल अन्फालः67].

अल्लाह तआला ताकतवर मज़बूत और ग़ालिब है।

उसे किसी शक्तिमान की शक्ति हानि नहीं पहुँचा सकती,और न किसी ताक़त वाले की ताक़त उसे आजिज़ कर सकती है... वह बरकत वाला,बुलंद और खबर रखने वाला है।

”अल अज़ीज़“

संपूर्ण इज़्ज़त उसी के लिये है,उस के अतिरिक्त हर चीज़ आजि़ज़ और ज़लील हैं,और उस के सामने हर शक्तिशाली कमज़ोर है,तो अल्लाह के अतिरिक्त हर चीज़ नीच(हक़ीर) है और हर मखलूक उस के समीप ज़लील है।

”अल अज़ीज़“

जिसे चाहता है इज़्जत देता है और जिस से चाहता है इज़्ज़त खींच लेता है,और जिसे चाहता है हीन कर देता है,उसी के हाथ में संपूर्ण भलाई है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक पूर्ण ग़ल्बा अल्लाह ही के लिये है“।}[यूनुसः 65].

हसब नसब और माल से मिलने वाली इज़्ज़त कोई इज़्जत नहीं,बल्कि इज़्ज़त तो वह है जो उस के करम से मिली हुयी हो।

”अल अज़ीज़“

जिसे भी इज़्ज़त मिलती है उसी की इज़्ज़त से मिलती है,और शक्ति भी उसी के करम से मिलती है,जो व्यक्ति पनाह चाहता हो वह अल्लाह तआला की पनाह माँगे,और जो इज़्ज़त का इच्छुक है वह अपने दिल से अल्लाह की ओर मुतवज्जेह हो जाये। {सम्मान तो केवल अल्लाह के लिये और उस के रसूल के लिये और ईमान वालों के लिये है“।}
[अल मुनाफिकू़नः 8].

बेशक अल्लाह तआला अल अज़ीज़ है

”अल अज़ीज़“.. जिस के लिये हर प्रकार की इज़्ज़त है,शक्ति की इज़्ज़त,ग़लबे की इज़्ज़त,और रुके रहने की इज़्जत,तो उस ने अपने आप को मखलूक़ की पहुँच से बाहर रखा है,और उस ने सारी सृष्टि को अपने वश में कर लिया है,संपूर्ण मखलूक उस के समीप नमस्तक और उस की महानता के आगे पस्त है।

अल्लाह तआला अल क़ाहिर और अल क़ह्हार है..

बेशक अल्लाह तआला अल क़ाहिर और अल क़ह्हार है..

वह इन्सान और जिन्नात पर ग़ालिब हैः {और वही अपने बंदों पर प्रभावशाली है और वही हिक्मत वाला,खबर रखने वाला है“।}[अल अनआमः 18].

”अल क़ह्हार“

अपनी बुलंदी,ज्ञान,एहाता,उपाय के ज़रिये मखलूक़ पर ग़ालिब है,इस लंबे चैड़े संसार मंे कोई भी चीज़ उस की आज्ञा और ज्ञान से बाहर नहीं है।

”अल क़ह्हार“

सर्कश और घमंडी लोगों को महान हुज्जतों और स्पष्ट दलीलांे के ज़रिये अकेले रब होने,माबूदे ह़क़ीक़ी होने और नामों एवं बुलंद विशेषताओं में यकता होने पर विजित(मगलूब)कर दिया।

”अल क़ह्हार“

ज़ालिम,सर्कश और घमंडियों को मग़लूब कर दिया,और क़यामत के दिन उन्हें उन की मरज़ी के विपरित विजित(मग़लूब) बना कर इकðा करेगा। {और सभी के सभी एक अल्लाह ज़बरदस्त के सामने होंगे“।}
[इब्राहीमः 48].

”अल क़ह्हार“

अल्लाह तआला ही की मरज़ी चलती है,मखलूक़ मंे से कोई उस की मरज़ी को रद्द नहीं कर सकता चाहे वह कितना ही महान क्यों न हो,वह अपनी कारीगरी में नायाब और अनोखा है,शक्तिमान लोग चाहे जितने वसाइल और साधन जुटालें वे आजिज़ ही रहेंगे,और उस की कारीगरी की प्रशंसा करने मंे ज़ुबानें गूँगी समझी जायेंगी चाहे जितनी अच्छाइयाँ और विशेषतायें उन में पाई जायें।

बेशक अल्लाह तआला अल क़ाहिर और अल क़ह्हार है..


अल्लाह तआला अर्रज़्जाक़ है..

बेशक अल्लाह तआला अर्रज़्जाक़ है.. {बेशक अल्लाह तो खुद रोज़ी देने वाला,ताक़त वाला और बलवान है“।}[अज़्ज़ारियातः 58].

”अर्रज़्जाक़“

जिस के हाथ में मखलूक़ की रोज़ी और उन की जीविका है,वह अल्लाह तआला ही की ज़ात है जो जिसे चाहे अधिक जीविका देती है,उसी के हाथ में मामलों का उपाय और आकाश एवं धरती की कुंजियाँ हैं,

{और धरती पर चलते फिरते जितने भी जानदार हैं सभी की रोज़ी अल्लाह पर है,वही उन के रहने की जगह भी जानता है और उन को सौंपे जाने की जगह भी“।}[हूदः 6].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और बहुत से जानवर हैं जो अपने रिज़्क़ लादे नहीं फिरते,उन सब को और तुम्हें भी अल्लाह तआला ही रोज़ी अता करता है,और वह सुनने जानने वाला है“।}[अल अनकबूतः 60].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक तेरा रब जिस के लिये चाहे रोज़ी का विस्तार कर देता है और जिस के लिये चाहे तंग कर देता है,बेशक वह अपने बंदों से बाखबर है और अच्छी तरह से देखने वाला है“।}
[अल इस्राः 30].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {अल्लाह जिसे चाहता है बेशुमार अता करता है“।}[अल बक़राः 212].

”अर्रज़्जाक़“

सब लोग अल्लाह तआला और उस की जीविका के मुहताज हैं,वह सब लोगों को जीविका देता है चाहे वे अच्छे हों या बुरे,पहले आने वालों में से हों या बाद में।

”अर्रज़्जाक़“

अल्लाह तआला हर उस व्यक्ति को रोज़ी देता है जो सच्चे दिल से उस की ओर मुतवज्जेह हो,और दिलों का ठीक ठाक होना,महत्वपूर्ण जीविका और पूर्ण नेमत है,और जो ज्ञान और विश्वास के साथ माँगता है उसे अल्लाह तआला हलाल रोज़ी देता है,जो दिलों के सूधार पर सहायक होती है और हर उस व्यक्ति को दीनी सुधार प्रदान करता है जो उस से दीनी सुधार माँगे।

बेशक अल्लाह तआला अर्रज़्जाक़ है..


अल्लाह तआला अल मलिक अल मालिक और अल मलीक है..

बेशक अल्लाह तआला अल मलिक है.. {वह मालिक और अधिक पाक है“।}
[अल हश्रः 23].

”अल मलिक“

वह महानता और बड़ाई वाला है,बंदों के मामलों की उपाय और तसर्रुफ करता है,सब बंदे उस के गुलाम और उस के मुहताज हैं,वह उन का बादशाह और मालिक है।

” अल हकीम “ .. वही ज़ात है जिस के लिये पैदा करने वाली विशेषता और हुक्म में बुलंद हिक्मत है,वह किसी चीज़ को बिना लाभ के पैदा नहीं करता,और न किसी बात का बेकार में हुक्म देता है,पहले और बाद में उसी के लिये बादशाहत है। ” अल मलिक अल मालिक “ .. उसी के लिये हुकूमत व बादशाहत है,वही है जिस में बादशाहत की विशेषता पाई जाती है,और यह विशेषता महानता,बड़ाई गलबा और उपाय के अर्थ को शामिल है,वह जिस के लिये पैदा करने,हुक्म देने और बदला देने का पूरा इख्तियार है,उसी के लिये सब निचली और ऊपरी दुनिया है सब उसी के गुलाम,बंदे और उसी के मुहताज हैं।

उसी के लिये संपूर्ण बादशाहत है,जितने भी बादशाह और हाकिम हैं सब उस के गुलाम हैं,और आसमान व ज़मीन में जो भी भलाई है सब उसी के करम और देन से है। {उस की मिल्कियत में ज़मीन व आसमान की सभी चीज़ें हैं“।}
[अल बक़राः 255].

”अल मलिक“

वह बिना हिसाब व किताब देता है,बंदों को अधि प्रदान करता है,और इस से उस की बादशाहत में कोई कमी नहीं होती,और न एक चीज़ दूसरी चीज़ से उस को बेखबर रखती है,और सही हदीसे कु़दसी में हैः «..यदि तुम में से पहला और अंतिम व्यक्ति,इन्सान और जिन्नात एक पलेट फार्म पर खड़ें हो जायें और मुझ से माँगें,और मैं उन में से हर एक की मुराद पूरी कर दूँ तो उस से मेरे खज़ानों में उसी प्रकार कमी होगी,जिस प्रकार सूई को समुद्र में डाल कर निकालने से होती है।..» (मुस्लिम)

”अल मलिक“

वह जिसे चाहता है बादशाह बना देता है,अल्लाह तआला ने फरमायाः{आप कह दीजिये ऐ अल्लाह! हे सारी दुनिया के मालिक तू जिसे चाहे मुल्क दे और जिस से चाहे मुल्क छीन ले,और तू जिसे चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे ज़लील कर दे,तेरे ही हाथों में सारी ही भलाइयाँ है,बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है“।}[आले इमरानः 26].

”अल मलीक“

वह अपनी मखलूक़ का मालिक है,और लोक एवं प्रलोक में उन के मामलों में तसर्रुफ करता है,इस लिये बंदे उसी की चाह में रहंे और उसी की पनाह ढूँडें और उसी की ओर से मिलने वाली नेमतों की आशा करते हुये अनुरोध,प्रार्थना गिड़गिड़ा कर और पुकार कर अधिकतर माँगें।

बेशक अल्लाह तआला अल मलिक अल मालिक और अल मलीक है..


अल्लाह तआला अल कुद्दूस है..

बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है..

वह अपनी बुलंदी और और बड़ाई में मुक़द्दस है,उस की प्रशंसा अधिकतर है और उस की नेमतें महान हैं.. {वही अल्लाह है जिस के सिवाय कोई पूज्य नहीं,मालिक,बहुत पाक और सभी बुराइयों से आज़ाद है“।} [अल हश्रः 23].वह पाक,क़ुद्दूस ज़ात फरिश्तांे और जिब्रीले अमीन का स्वामी है... वह पाक ज़ात अलमलिक और अल कु़द्दूस है।

”अल कु़द्दूस अस्सलाम“ .. वह महान ज़ात हर प्रकार के अैब और कमी और मखलूक़ में से किसी की मुशाबहत से पाक है,वह हर अैब से पाक है और इस बात से भी पाक है कि उस की मखलूक़ में से कोई उस के क़रीब हो या कोई उस के कमालात में से किसी चीज़ की तरह हो।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है..ृ

अल्लाह तआला हर अैब और हर कमी से पाक है अथवा हर उस विशेषता से पाक है जो उस के शायाने शान नहीं है।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“

वह पूर्णता,सुंदरता और महिमा जैसी विशेषताओं से मुŸासिफ है,हर कमी और हर एक अैब से पाक है,उस जैसी न तो कोई चीज़ है और न ही कोई उस के समकक्ष है,उस की पूर्णता के ऊपर कोई पूर्णता नहीं और न ही कोई उस के नामों और उस की विशेषताओं की बुलंदी को पहुंच सकता है।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“

वह ज़ात जिस की पविन्नता दिल बयान करते हैं और संपूर्ण आशायें उसी से जुड़ी हुयी हैं, और जु़बान उस की पविन्नता के गीत गाते हैं,अथवा हर समय उस की तस्बीह बयान करते हैं।

” बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“

वह बरकत,दानी,करम और प्रशंसा वाला है,उसी की ओर से बरकतें शुरू और खतम होती हैं,वह बरकत वाला है जो अपने बंदों को बरकत प्रदान करता है,और अपनी इच्छा अनुसार अपनी दी हुयी चीज़ों में बरकत डाल देता है।

”बेशक अल्लाह तआला अल कुद्दूस है“


अल्लाह तआला अस्सलाम है..

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है..

अल्लाह तआला अस्सलाम है और उसी से शांति है कोई व्यक्ति उस की ओर से मिलने वाली शांति के बिना शांति से नहीं रह सकता और कोई भी कामयाबी उस की ओर से मिलने वाली तौफीक़ के बिना पूरी नहीं हो सकती है।

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है

वह हर कमी और हर अैब से महफूज़,और संसार को मुसीबतों और आफतों से बचाने वाला है

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है

अल्लाह तआला की विशेषतायें सृष्टि समान नहीं हैं, वह हर प्रकार की कमी और कोताहियों से संरक्षित हैं,उस का ज्ञान पूर्ण और संरक्षित है,उस का न्याय हर चीज़ को घेरे हुये अथवा संरक्षित है,उस का फैसला संरक्षित है,उस की कारीगरी संरक्षित है,वह अस्सलाम है,उसी से शांति है वह बरकत,महिमा और सम्मान वाला है।

अल्लाह तआला ने अपने बंदों के लिये दोनों संसार में शांति लिख दी है। {इब्राहीम पर सलाम हो“।}[अस्साफ्फातः 109].

{मूसा और हारून पर सलाम हो“।}
[अस्साफ्फातः 120].

{और पैग़म्बरों पर सलाम हो“।}
[अस्साफ्फातः 181].

और प्रलोक में अल्लाह तआला कहेगाः {सलामती और अमन के साथ उस में दाखिल हो जाओ“।}[अल हिज्रः 46].

अस्सलाम

संपूण शांति जिस के पश्चात कोई डर नहीं और संपूर्ण क्षमा जिस के बाद कोई भय नहीं।

वही शांति है और उसी से शांति है।

बेशक अल्लाह तआला अस्सलाम है..


अल्लाह तआला अल हक्क़ है..

बेशक अल्लाह तआला अल हक्क़ है..

{यह इस लिये कि अल्लाह ही हक़ है“।}
[अल हज्जः 6].

”अल्लाह तआला अल हक्क़ है“..

वह अपनी ज़ात और विशेषताओं में सत्य है,वह पूर्ण सिफात और विशेषताओं वाला है,उस का वजूद ज़ाती है और उसी के वजूद से हर चीज़ का वजूद है,वही है जो अपनी महिमा,सुंदरता,और पूर्णता के साथ हमेशा से है और हमेशा रहेगा,इसी प्रकार उस का उपकार हमेशा से जाना पहचाना है और हमेशा जाना पहचाना रहेगा।

”अल्लाह तआला अल हक्क़ है“..

उस की बात,उस का काम,उस से मुलाक़ात,उस के रसूल,उस की किताबें,उस का दीन,और उस की अकेले उपासना सब सत्य और हक़ हैं,और उस की ओर मंसूब होने वाली हर चीज़ हक़ है। {यह सब इस लिये कि अल्लाह ही सच है,और उस के सिवाय जिसे भी यह पुकारते हैं वे झूटे हैं, और बेशक अल्लाह बुलंद और बड़ाई वाला है“।}[अल हज्जः 62].

बेशक अल्लाह तआला अल हक्क़ है..


अल्लाह तआला अल मोमिन और अल मुहैमिन है..

बेशक अल्लाह तआला अल मोमिन और अल मुहैमिन है..

{वही अल्लाह है जिस के सिवाय कोई पूज्य नहीं,मालिक,बहुत पाक और सभी बुराइयों से आज़ाद है,शांति अता करने वाला और रक्षक है“।}
[अल हश्रः 23].

”अलमोमिन“..

जो वह्य के ज़रिये अपने बंदों और अपनी मखलूक के बीच शांति फैलाता है। {और उन्हें डर मंे अमन अता किया“।}[कु़रेशः 4].

”अलमोमिन“...

शांति देने वाला,रक्षा करने वाला है और अपने मखलूक़ के सारे अमल की खबर रखने वाला है।

”अलमोमिन“...

वह बदले में कोई कमी नहीं करता,और न सज़ा में कोई ज़्यादती करता है,वह दया,फज़्ल,अच्छाई,और दान के अधिक योग्य है।

”अल मुहैमिन“

वह अपने बंदों का रक्षक है वह उन पर ग़ालिब है और उन्हें नियंन्नित किया,उन की देख रेख करता है,उन के करतूतों और हालतों को जानता है,उस ने बंदों के हर एक चीज़ को घेर रखा है,हर मामला उस के लिये सरल और हर चीज़ उस की आवश्यक है...

{उस जैसी कोई चीज़ नहीं वह सुनने वाला देखने वाला है“}[अश्शूराः 11].

बेशक अल्लाह तआला अल मोमिन और अल मुहैमिन है..

” अल मोमिन “.. वह ज़ात जिस ने अपनी पूर्ण विशेषताओं और पूर्ण महिमा और सुंदरता के कारण स्वयं की प्रशंसा की है,और जिस ने अपने मैसंेजर को भेजा और दलाइल एवं प्रमाण के साथ किताबें उतारी,और रसूलों के लाये हुये पैग़ाम के सत्य होने और स्वयं रसूलों की सत्यता पर प्रमाणित दलीलों और चिन्हांे से उन की सत्यता साबित की। ”अल मुहैमिन“ वह छुपे हुये मामलांे और सीनांे में छुपी हुयी चीज़ों की खबर रखता है,उस ने अपने ज्ञान से हर चीज़ को घेर रखा है।

अल्लाह तआला अल अफ्व,अल ग़फूर और अल ग़फ्फार है..

बेशक अल्लाह तआला अल अफ्व और अल ग़फ्फार है.. {बेशक अल्लाह तआला माफ करने वाला अधिक क्षमा करने वाला है“।}[अल हज्जः 60].

बेशक अल्लाह तआला अल अफ्व अल ग़फूर और अल ग़फ्फार है..

वह ज़ात जो हमेशा हमेश से अपनी क्षमा से जानी पहचानी जाती है,और जिस में अपने बंदों को माफ करने और उन्हें दरगुज़र करने की विशेषता पाई जाती है,हर एक उस की क्षमा और माफी की मुहताज है जैसे हर एक चीज़ उस की दया और करम की मुहताज है।

हे वह ज़ात जिस ने उस व्यक्ति के लिये क्षमा करने का वादा किया है जो क्षमा के कारणों को अपनाये,अल्लाह तआला ने फरमायाः {और बेशक मैं उन्हें माफ कर देने वाला हूँ जो माफी माँगें,ईमान लायंे,नेकी के काम करें और सीधे रास्ते पर भी रहें“।}[ताहाः 82].

हे क्षमा करने वाले हम तुझ से इस बात के सवाली हैं कि तू हमें सच्ची तोबा की तौफिक दे, जिस के बाद हम गुनाहों से दूर हो जायें, और उसे छोड़ दें,और जो कुछ हमने ग़लत और पाप किया है उस पर शर्मिंदा हैं,और तेरी फरमाबरदारी करने का और तेरी नाफरमानी न करने का पुखता इरादा कर लें,हे क्षमा करने वाले हमें क्षमा कर दे।

हे अल्लाह तू क्षमा करने वाला है,क्षमा को प्रिय रखता है,तू हमें भी क्षमा कर दे... ऐ अल्लाह तू ने हमें खबर दी है कि तू अधिक क्षमा करने वाला और अधिक दयालू है... {मेरे बंदों को खबर कर दो कि मैं बहुत माफ करने वाला और बहुत रहम करने वाला हूँ“।}[अल हिज्रः 49].

तो हम पर कृपा कर,और ऐ क्षमा करने वाले हमें क्षमा कर दे।

बेशक अल्लाह तआला अल अफ्व अल ग़फूर और अल गफ्फार है..


अल्लाह तआला अŸाव्वाब है ..

बेशक अल्लाह तआला अŸाव्वाब है .. {बेशक अल्लाह तआला बहुत ज़्यादा तोबा क़बूल करने वाला और रहम करने वाला है“।}[अŸाोबाः 118].

” अŸाव्वाब “

वह ज़ात जिस ने अपने बंदों के लिये उन पर करम,उपकार और एहसान करते हुये तोबा को मश्रू किया, बल्कि इस के अतिरिक्त अधिक पुरस्कार का वादा किया,अर्थात उन के बुराइयों को नेकियों में बदल दिया जायेगा।

” अŸाव्वाब “

वह ज़ात जो अपने बंदों को तोबा पर क़ायम रखती है,और फर्ज़ की अदायगी में उन की सहायता करती है।

” अŸाव्वाब “

वह ज़ात जो अपने बंदों को तोबा की तौफीक़ देती है,और उन्हें तोबा की इच्छा दिलाती है,और फिर तोबा की बुनियाद पर स्वयं उन से मुहब्बत करने लगती है।

” अŸाव्वाब “

जो हमेशा अपने बंदे की तोबा क़बूल करता है और तोबा करने पर उन्हें सवाब देता है और बंदों के दरजों को बुलंद करता है और उन के गुनाहों को मिटाता है,क्या ही महान है अल्लाह और किस क़दर उस की शान बुलंद है।

बेशक अल्लाह अŸाव्वाब है..

” अŸाव्वाब “ जो हमेशा तोबा करने वालों की तोबा क़बूल करता है और गुनहगारों के गुनाहों को क्षमा करता है,हर वह व्यक्ति जो अल्लाह तआला से सच्ची तोबा करे अल्लाह तआला उस की तोबा क़बूल करता है,वह तोबा करने वालों को पहले तोबा की तौफीक़ देता है और उन के दिलों को अपनी ओर मुतवज्जेह करता है,फिर तोबा करने के बाद उन की तोबा को क़बूल करते हुये उन की गलतियों को क्षमा करता है.

अल्लाह तआला अलवाहिद और अल अहद है..

बेशक अल्लाह तआला अलवाहिद और अल अहद है..

हे वह ज़ात जिस की ज़ात अकेली है और जो अपने नामों और विशेषताओं के एतबार से अकेला है।

हम तुझ से इख्लास,मुहब्बत और महत्वाकांक्षा (पुखता इरादा) के सवाली हैं ऐ अकेली और बेनियाज़ ज़ात।

”अल अहद“

वह अपनी ज़ात और अपने नामों एवं विशेषताओं में अकेला है,उस का न तो कोई समकक्ष है न कोई उस के मुशाबेह है और न ही उस जैसी कोई चीज़ है। {क्या तेर इल्म में उस का हमनाम कोई दूसरा भी है“।}[मरयमः 65].

”अल अहद“

वह इबादत के योग्य और उलूहियत में अकेला है,इस लिये अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य उपास्य नहीं, और हर प्रकार की इबादत चाहे वह छोटी हो या बड़ी उस के अतिरिक्त किसी की नहीं की जायेगी।

”अल अहद“

वह एक है जिस का इरादा किया जाता है, और वह एक पालनहार है जिस की उपासना की जाती है,दिलों की गहराइयों ने इस की गवाही दी और गै़ब की खबर रखने वाले अल्लाह से निगाहें जुड़ गईं।

”अल वाहिद अल अहद“

अल्लाह तआला ने अपने बंदों को अपनी तौहीद पर पैदा किया है,उस का कोई साझी नहीं,कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जिस ने अल्लाह के अतिरिक्त की ओर धियान लगाया हो और वह कामयाब होगया हो,और न ही कोई ऐसा बंदा है जिस ने अल्लाह के अतिरिक्त की इबादत की हो और वह खुश भी हो,और न ही कोई बंदा ऐसा है जिस ने उस का साझी बनाया और वह सफल रहा हो।

बेशक अल्लाह तआला अल वाहिद और अल अहद है.


ल्लाह तआला अस्समद है..

बेशक अल्लाह तआला अस्समद है..

{कह दीजिये कि वह अल्लाह एक है,अल्लाह बेनियाज़ है“।}[अल इख्लासः 1-2].

”अस्समद“...

अपने नामों और विशेषताओं में संपूर्ण है,उस में किसी प्रकार की कोई कमी और कोताही प्रवेश नहीं कर सकती।

”अस्समद“...

वह बेनियाज़ है उस के सब मुहताज हैं और वह किसी का मुहताज नहीं। {वह खिलाता है और खिलाया नहीं जाता“।}[अल अनआमः 14].

”अस्समद“

वह पालनहार,उपाय करने वाला,मालिक और तसर्रुफ करने वाला है।

” अल वाहिद अल अहद“ वह अल्लाह जो अपने तमाम पूर्णता में अकेला है,इस प्रकार कि इन पूर्णताओं में उस का कोई साझी नहीं,और बंदों पर यह अनिवार्य है कि अक़्ल के एतबार से,ज़ुबान के एतबार से और अमल के एतबार से अल्लाह तआला की यकताइयत को स्वीकारें,अर्थात वे अल्लाह तआला की निरपेक्ष पूर्णता और यकताइयत में अकेले होने को स्वीकार करें और हर प्रकार की इबादत का योग्य केवल उसी को जानें।

”अस्समद“

ज़रूरत के समय दिल उस की ओर मुतवज्जेह होते हैं तो वह उन्हें देता है, मना नहीं करता है,परेशानियों के समय दिल उसे पुकारते हैं तो वह उन की पुकार क़बूल करते हुये उन की परेशानियों को दूर करता है,उस से कटे हुये लोग जब उसे पुकारते हैं तो वह उन्हें जोड़ लेता है,और डरे हुये लोग उस का इरादा करते हैं तो वह उन्हें शांति देता है,और एकेश्वरवादी उस से आशा लगाते हैं तो वह उन की मुरादें पूरी करता है,दुखी लोग उस से प्रार्थना करते हैं तो वह उन्हे दुखों से मुक्ति देता है,और बंदे उस की ओर झुकते हैं तो अल्लाह तआला उन के मरतबे को ऊँचा करता है।

बेशक अल्लाह तआला अस्समद है..

”अस्समद“ वह ज़ात है जिस का इरादा संपूर्ण मखलूक़ अपनी ज़रूरतों,आवश्यक्ताओं और तमाम हालतों मे करती है,क्योंकि उसे अपनी ज़ात,अपने नामों,अपनी विशेषताओं और अपने कार्यों में हर प्रकार की पूर्णता प्राप्त है।

अल्लाह तआला अल अज़ीज़ है..

बेशक अल्लाह तआला अल अज़ीज़ है.. {और अल्लाह ग़ालिब हिक्मत वाला है“।}

[अल अन्फालः67].

अल्लाह तआला ताकतवर मज़बूत और ग़ालिब है।

उसे किसी शक्तिमान की शक्ति हानि नहीं पहुँचा सकती,और न किसी ताक़त वाले की ताक़त उसे आजिज़ कर सकती है... वह बरकत वाला,बुलंद और खबर रखने वाला है।

”अल अज़ीज़“

संपूर्ण इज़्ज़त उसी के लिये है,उस के अतिरिक्त हर चीज़ आजि़ज़ और ज़लील हैं,और उस के सामने हर शक्तिशाली कमज़ोर है,तो अल्लाह के अतिरिक्त हर चीज़ नीच(हक़ीर) है और हर मखलूक उस के समीप ज़लील है।

”अल अज़ीज़“

जिसे चाहता है इज़्जत देता है और जिस से चाहता है इज़्ज़त खींच लेता है,और जिसे चाहता है हीन कर देता है,उसी के हाथ में संपूर्ण भलाई है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक पूर्ण ग़ल्बा अल्लाह ही के लिये है“।}[यूनुसः 65].

हसब नसब और माल से मिलने वाली इज़्ज़त कोई इज़्जत नहीं,बल्कि इज़्ज़त तो वह है जो उस के करम से मिली हुयी हो।

”अल अज़ीज़“

जिसे भी इज़्ज़त मिलती है उसी की इज़्ज़त से मिलती है,और शक्ति भी उसी के करम से मिलती है,जो व्यक्ति पनाह चाहता हो वह अल्लाह तआला की पनाह माँगे,और जो इज़्ज़त का इच्छुक है वह अपने दिल से अल्लाह की ओर मुतवज्जेह हो जाये। {सम्मान तो केवल अल्लाह के लिये और उस के रसूल के लिये और ईमान वालों के लिये है“।}
[अल मुनाफिकू़नः 8].

बेशक अल्लाह तआला अल अज़ीज़ है

”अल अज़ीज़“.. जिस के लिये हर प्रकार की इज़्ज़त है,शक्ति की इज़्ज़त,ग़लबे की इज़्ज़त,और रुके रहने की इज़्जत,तो उस ने अपने आप को मखलूक़ की पहुँच से बाहर रखा है,और उस ने सारी सृष्टि को अपने वश में कर लिया है,संपूर्ण मखलूक उस के समीप नमस्तक और उस की महानता के आगे पस्त है।

अल्लाह तआला अल क़ाहिर और अल क़ह्हार है..

बेशक अल्लाह तआला अल क़ाहिर और अल क़ह्हार है..

वह इन्सान और जिन्नात पर ग़ालिब हैः {और वही अपने बंदों पर प्रभावशाली है और वही हिक्मत वाला,खबर रखने वाला है“।}[अल अनआमः 18].

”अल क़ह्हार“

अपनी बुलंदी,ज्ञान,एहाता,उपाय के ज़रिये मखलूक़ पर ग़ालिब है,इस लंबे चैड़े संसार मंे कोई भी चीज़ उस की आज्ञा और ज्ञान से बाहर नहीं है।

”अल क़ह्हार“

सर्कश और घमंडी लोगों को महान हुज्जतों और स्पष्ट दलीलांे के ज़रिये अकेले रब होने,माबूदे ह़क़ीक़ी होने और नामों एवं बुलंद विशेषताओं में यकता होने पर विजित(मगलूब)कर दिया।

”अल क़ह्हार“

ज़ालिम,सर्कश और घमंडियों को मग़लूब कर दिया,और क़यामत के दिन उन्हें उन की मरज़ी के विपरित विजित(मग़लूब) बना कर इकðा करेगा। {और सभी के सभी एक अल्लाह ज़बरदस्त के सामने होंगे“।}
[इब्राहीमः 48].

”अल क़ह्हार“

अल्लाह तआला ही की मरज़ी चलती है,मखलूक़ मंे से कोई उस की मरज़ी को रद्द नहीं कर सकता चाहे वह कितना ही महान क्यों न हो,वह अपनी कारीगरी में नायाब और अनोखा है,शक्तिमान लोग चाहे जितने वसाइल और साधन जुटालें वे आजिज़ ही रहेंगे,और उस की कारीगरी की प्रशंसा करने मंे ज़ुबानें गूँगी समझी जायेंगी चाहे जितनी अच्छाइयाँ और विशेषतायें उन में पाई जायें।

बेशक अल्लाह तआला अल क़ाहिर और अल क़ह्हार है..


अल्लाह तआला अर्रज़्जाक़ है..

बेशक अल्लाह तआला अर्रज़्जाक़ है.. {बेशक अल्लाह तो खुद रोज़ी देने वाला,ताक़त वाला और बलवान है“।}[अज़्ज़ारियातः 58].

”अर्रज़्जाक़“

जिस के हाथ में मखलूक़ की रोज़ी और उन की जीविका है,वह अल्लाह तआला ही की ज़ात है जो जिसे चाहे अधिक जीविका देती है,उसी के हाथ में मामलों का उपाय और आकाश एवं धरती की कुंजियाँ हैं,

{और धरती पर चलते फिरते जितने भी जानदार हैं सभी की रोज़ी अल्लाह पर है,वही उन के रहने की जगह भी जानता है और उन को सौंपे जाने की जगह भी“।}[हूदः 6].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और बहुत से जानवर हैं जो अपने रिज़्क़ लादे नहीं फिरते,उन सब को और तुम्हें भी अल्लाह तआला ही रोज़ी अता करता है,और वह सुनने जानने वाला है“।}[अल अनकबूतः 60].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक तेरा रब जिस के लिये चाहे रोज़ी का विस्तार कर देता है और जिस के लिये चाहे तंग कर देता है,बेशक वह अपने बंदों से बाखबर है और अच्छी तरह से देखने वाला है“।}
[अल इस्राः 30].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {अल्लाह जिसे चाहता है बेशुमार अता करता है“।}[अल बक़राः 212].

”अर्रज़्जाक़“

सब लोग अल्लाह तआला और उस की जीविका के मुहताज हैं,वह सब लोगों को जीविका देता है चाहे वे अच्छे हों या बुरे,पहले आने वालों में से हों या बाद में।

”अर्रज़्जाक़“

अल्लाह तआला हर उस व्यक्ति को रोज़ी देता है जो सच्चे दिल से उस की ओर मुतवज्जेह हो,और दिलों का ठीक ठाक होना,महत्वपूर्ण जीविका और पूर्ण नेमत है,और जो ज्ञान और विश्वास के साथ माँगता है उसे अल्लाह तआला हलाल रोज़ी देता है,जो दिलों के सूधार पर सहायक होती है और हर उस व्यक्ति को दीनी सुधार प्रदान करता है जो उस से दीनी सुधार माँगे।

बेशक अल्लाह तआला अर्रज़्जाक़ है..


अल्लाह तआला अल्लतीफ है..

बेशक अल्लाह तआला अल्लतीफ है..

{बेशक मेरा रब जो चाहे उस के लिये अच्छी व्यवस्था करने वाला है“।}[युसुफः 100].

” अल्लतीफ ़“

वह ज़ात जिस ने अपनी दयालुता,मुहब्बत और चाहत से मखलूक़ को मखलूक़ के ताबे कर दिया।

” अल्लतीफ ़“

जो अधिक नेकियाँ,महान उपहार और गिफ्ट देने वाला है।

” अल्लतीफ ़“

अपने बंदों के साथ नरमी का मामला करने वाला है।{अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा ही कृपा करने वाला है“।}[अश्शूराः 19].

og mUgsa ogh pht+ nsrk gS tks mu ds nhuks nुनिया के लिये उत्तम हो और उन्हें वह चीज़ेें नहीं देता जो उन के दीनो दुनिया के लिये बुरी हांे।

” अल्लतीफ ़“

उसे किसी की निगाह एहाता नहीं कर सकती और वह सब की निगाहों को अपने एहाते में रखे हुये है। {आँखें उसे देख नहीं सकततीं और वह सभी निगाहों को देखता है और वह गहराई से देखने वाला सर्वसूचित है“।}[अल अनआमः 103].

” अल्लतीफ ़“

वह सब छुपे मामलों को जानता है,और सब बारीक कार्यों की खबर रखता है,रात व दिन में कोई चीज़ उस से छुपी नहीं है,वह अपने बंदों के लिये छोटे से छोटे और बड़े से बड़े हितों को जानता है और उन पर करम करता है।

” अल्लतीफ ़“

जब भी वह किसी मामले में फैसला करता है तो अपने बंदों पर नरमी करता है,और जब भी किसी चीज़ को मुक़द्दर करता है तो उस में बंदों की सहायता करता है,और जब मामले बिगड़ जाते हैं और रास्ते बंद हो जाते हैं तो वह उन के लिये सरलता के द्वार खोल देता है,और जब मामला कठिन हो जाता है तो वह उन पर आसानी पैदा कर देता है।

बेशक अल्लाह तआला अल्लतीफ है..


अल्लाह तआला अल फŸााह है..

अल्लाह तआला अल फŸााह है..

{और वह फैसला करने वाला सब कुछ जानने वाला है“।}[सबाः 26].

” अल फŸााह“

वह हमारे ऊपर अपनी दया के द्वार खोलता है..

{अल्लाह जो दया लोगों के लिये खोलता है तो उस का कोई बंद करने वाला नहीं“।}[फातिरः 2].

”अल फŸााह“

अल्लाह तआला ने हम पर और आप पर अपनी बरकतों के द्वार खोल दिये हैं... और हमें अपने करम और उपकारों को अता किया है... और हम पर क्षमा और उपहारों की वर्षा की है।

अल्लाह तआला बंद दिलों को हिदायत और ईमान की कुंजी से खोल देता है।

”अल फŸााह“

अल्लाह तआला करम के द्वार खोल कर सैराब करता है,और अधिकतर नेमतों की वर्षा करता है,और उन के लिये ज्ञान की रोशनी प्रकट करता है और उन की बुद्वियों के लिये हिकमत प्रदान करके उसे संवारता है,और उन के दिलों को ईमान के लिये खोल देता है फिर उन्हें सत्य मार्ग पर चलाता है।

”अल फŸााह“

जो अपने बंदों से ग़म को दूर करता है, और उन्हें हर संकट से मुक्ति देता है,और उन के हर नुक़्सान को दूर करता है।

”अल फŸााह“

वह प्रलोक में अपने बंदो पर न्याय करेगा,और वह अभिभावक (सरपरस्त) है अथवा प्रशंसा के योग्य है।

बेशक अल्लाह तआला अल फŸााह है..

”अल फŸााह“ जो अपने बंदों को शरई अह्काम,तक़्दीर के फैसले और जज़ा और सज़ा के अह्काम के ज़रिये नियंन्नित करता है,जिस ने अपने करम से सच्चों की आँखें खोल दी हैं,और उन के दिलों को अपनी मारफत,मुहब्बत और अपनी ओर लौटने के लिये खोल दिया है,और उस ने अपने बंदोें के लिये दया और अनेक प्रकार की जीविका के द्वार खोल दिये हैं।

अल्लाह तआला अल ग़नी और अल मुग़नी है..

बेशक अल्लाह तआला अल ग़नी और अल मुग़नी है..

” अल ग़नी ़“

वह अपनी ज़ात के एतबार से बेनियाज़ है,जिस के लिये पूर्ण बेनियाज़ी है,उस की विशेषताओं और उस की पूर्णता में किसी प्रकार की कमी पैदा नहीं हो सकती,और उस के लिये बेनियाज़ी के सिवा कुछ और होना असंभव है,क्योंकि बेनियाज़ी उस की ज़ात की आवश्यक विशेषता है,जिस प्रकार उस का खालिक़ राजि़क,क़ादिर और मुह्सिन होने के अतिरिक्त कुछ और होना असंभव है,वह किसी भी प्रकार से किसी का मुहताज नहीं,वह बेनियाज़ है,उसी के हाथ में आकाश एवं धरती की कुंजियाँ हैं,वह अपनी मखलूक़ को आम तौर पर बेनियाज़ बनाने वाला है।

”अल ग़नी“

वह अपने बंदों से बेनियाज़ है,वह उन से खाना पीना नहीं माँगता,उस ने बंदों को इस लिये पैदा नहीं किया कि अपनी कमी को उन से पूरा करे,और न इस लिये कि अपनी कमज़ोरी को उन से शक्ति पहुँचाये,और न इस लिये कि अपनी वह्शत को दूर करने के लिये उन से मानूस हो,बल्कि बंदे ही अपने खाने पीने और संपूर्ण मामलों को हल करने में उसी के मुहताज हैं,अल्लाह तआला ने कहाः {मैंने जिन्नात और इन्सानों को सिर्फ इसी लिये पैदा किया है कि वे केवल मेरी इबादत करें,न मैं उन से जीविका चाहता हूँ,न मेरी यह इच्छा है कि ये मुझे खिलायें“।}[अज़्ज़ारियातः 56-57].

”अल मुग़नी“

वह लोगों को उन की ज़रूरतों और मुहताजगी से बेनियाज़ रखता है,वह अपने बंदों को देने में कमी नहीं करता,और बंदों को उस के अतिरिक्त किसी और की आवश्यक्ता नहीं,जैसा कि हदीसे कु़दसी में आया है किः «अगर तुम में से पहला और अंतिम व्यक्ति,इन्सान और जिन्नात एक पलेटफार्म पर खड़े हो जायें और मुझ से माँगें और मैें उन में से हर एक की ज़रूत पूरी करूँ तो उस से मेरे खज़ानों में बिलकुल उसी प्रकार कमी होगी,जिस प्रकार सूई को समुद्र मेें डाल कर निकालने से होती है..» (मुस्लिम).

”अल मुक़ीत“ जिस ने हर एक मखलूक को वह चीज़ें पहुँचा दी हैं जिन से वे अपना पेट भरते हैं,और हर एक को उस की जीविका दे दी है,और अपनी हिक्मत और प्रशंसा को देखते हुये जैसा चाहता उस में तसरुफ करता है।

”अल मुग़नी“

वह अपने कुछ बेंदों को हिदायत और उन के दिलों की सुधार केे ज़रिये बेनियाज़ करता है,अर्थाता उन्हें अपने ज्ञान,महिमा,महानता,और अपनी मुहब्बत प्रदान करता है,तो दुनियावी सुधार से ज़्यादा और अधिकतर पूर्ण और महत्व चीज़ों से उन्हें बेनियाज़ करता है।

हे वह ज़ात जिस के देने से उस के खज़ाने में कोई कमी नहीं होती... हमें हराम से बचाते हुये हलला रोज़ी के ज़रिये बेनियाज़ कर दे,क्योंकि तू खूद बे नियाज़ है और बेनियाज़ी अता करने वाला है।

बेशक अल्लाह तआला बे नियाज़ है और बेनियाज़ी अता करने वाला है..


अल्लाह तआला अल मुक़ीत है..

बेशक अल्लाह तआला अल मुक़ीत है..

{और अल्लाह हर चीज़ पर कु़दरत रखने वाला है“।}[अन्निसाः 85].

”अल मुक़ीत“

वह ज़ात जिस ने संपूर्ण सृष्टि को जीविका दी और उन के लिये वह चीज़ें पैदा कर दीं जिस से यह जीवित रहें,तो उस ने उन्हें वह सब प्रदान किया जिस से ये अपनी प्यास बुझाते हैं,अपनी भूक मिटाते हैं,और अपना जीवन आनंद लेकर बिताते हैं।

”अल मुक़ीत“

जो दिलों को अनेक प्रकार के इल्मो ज्ञान से शक्ति प्रदान करता है,जिस से रूहें जीवित रहती हैं और नफ्सों को खुशी मिलती है।

हे अल्लाह!हे वह ज़ात जो अपनी मखलूक़ के कामों,उन की रोज़ी और उन के लौट कर वापस आने की जगह का उपाय और इन्तिज़ाम करती है ... (हे अल्लाह!) हम तुझ से तेरी रक्षा,तेरी क्षमा और तेरी भलाई के सवाली हैं। {और अल्लाह हर चीज़ पर कु़दरत रखने वाला है“।}[अन्निसाः 85].

बेशक अल्लाह तआला अल मुक़ीत है..

”अल मुक़ीत“ ने हर एक मखलूक को वह चीज़ें पहुँचा दी हैं जिन से वे अपना पेट भरते हैं,और हर एक को उस की जीविका दे दी है,और अपनी हिक्मत और प्रशंसा को देखते हुये जैसा चाहता उस में तसरुफ करता है। ”ल हसीब“.. अल्लाह तआला अपने बंदों को जानने वाला है,भरोसा करने वालों के लिये काफी है,अपने बंदों को अपनी हिक्मत और ज्ञान से उन के हर छोटे बड़े अमल का बदला देता है। अल काफी“.. वह अपने बंदों की संपूर्ण उन चीज़ों के लिये काफी है जिन की उन्हें ज़रूरत पड़ती है,और जिस की ओर वे मजबूर होते हैं,और जो उस पर ईमान लाये,उस पर भरोसा करे और अपनी दीनी व दुनियावी ज़रूरतों में उसी से सहायता माँगे तो उस के लिये वह विशेष तौर पर काफी है।

अल्लाह तआला अल हसीब और अल काफी है..

बेशक अल्लाह तआला अल हसीब और अल काफी है..

अल्लाह तआला अपने मखलूक का काम बनाने वाला है,और वह उन के लिये हर चीज़ से काफी है..

{क्या अल्लाह अपने बंदों के लिये काफी नहीं?“}
[अज़्जु़मरः 36].

अल्लाह तआला हमारे लिये काफी है और अच्छा काम बनाने वाला है ..जब खलील इब्राहीम को आग में डाला गया तो उन्हों ने यही कहाः(अल्लाह तआला हमारे लिये काफी है और अच्छा काम बनाने वाला है) तो आग इब्राहीम के लिये शांति के साथ ठंड हो गई,और इसे सहाबा ने कहा,जैसा कि अल्लाह तआला ने अपने इस कथन में जि़क्र किया हैः {बेशक लोग तुम्हारे लिये इकðा हो चुके हैं“।}[आले इमरानः 173].

तो उन्हों ने कहाः {अल्लाह हमारे लिय बस है और वह सब से अच्छा संरक्षक है,वह अल्लाह की नेमत के साथ वापस हुये उन्हें कोई दुख नहीं पहुँचा,उन्होंने अल्लाह की प्रसन्नता का रास्ता अपनाया“।}[आले इमरानः 173-174].

अल्लाह तआला हिसाब लेने वाला और अपने बंदों का हिसाब करने वाला है,उन के अमल का बदला देने वाला है,अगर अच्छे अमल हैं तो अच्छा बदला और अगर बुरे अमल हैं तो बुरा बदला ताकि करतूत अनुसार बदला मिल सके।

{और वह बहुत जल्द हिसाब लेगा“।}[अल अनआमः 62].

”अल हसीब“

अपने मखलूक़ के ज़ाहिरी और छुपी हुयी चीज़ों को विस्तार से जानता है।

हे हमारे पालनहार,ऐ काफी हमारी ज़रूरतों के लिये काफी होजा,और हमें समझ बूझ प्रदान कर और ऐ करम करने वाले हमें अधिकतर भलाई दे। {और लेखा-जोखा के लिये अल्लाह काफी है“।}[अन्निसाः 6].

बेशक अल्लाह तआला अल हसीब और अल काफी है..


अल्लाह तआला अल मुबीन है..

बेशक अल्लाह तआला अल मुबीन है..

{बेशक अल्लाह ही सच है,वही ज़ाहिर करने वाला है“।}[अन्नूरः 25]-

हे ऊँची शान वाले ज़ाहिर करने वाली ज़ात... हमारे लिये हक़ का मार्ग रोशन कर दे,और हे पालनहार! गलत मार्ग हम पर खलत मलत हो जाये इस से हमारी रक्षा कर।

अल्लाह तआला हक और सब तथ्यों को प्रकट करने वाला है और उस समय सब संदेह दूर हो जोयेंगे।

अल्लाह तआला अपनी यकताइयत के मामले में बिलकुल वाजे़ह है और निःसंदेह उस का कोई साझी नहीं।

”अल मुबीन“

अपनी उदारता,अपने वजूद और अपनी बादशाहत पर बंदों के लिये जो हिस्सी और आंतरिक(मानवी) दलाइल बयान किये हैं वह मखलूक पर ढकी छुपी नहीं हैं।

”अल मुबीन“

जिस ने रसूलों को स्पष्ट किताब दे कर अपने बंदों के लिये सत्य मार्ग को वाजे़ह कर दियाः

{तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से नूर और खुली किताब आ चुकी है“।}[अल माइदाः 15].अल्लाह तआला ही है जिस ने अपने बंदों के लिये खुश बखती की राह दिखाई,और उन्हें अपनी आज्ञांपालन और अपनी तौहीद से जोड़ दिया ।

बेशक अल्लाह तआला अल मुबीन है।


अल्लाह तआला अल क़दीर,अल मुक़्तदिर और अल क़ादिर है..

अल्लाह तआला अल क़दीर,अल मुक़्तदिर और अल क़ादिर है..

{और अल्लाह हर चीज़ पर कु़दरत रखने वाला है“।}[अल बक़राः 284].

{सच्चाई और इज़्ज़त की बैठक में कु़दरत वाले मालिक के पास“।}[अल क़मरः 55].

{कहिये कि वही है जो ताक़त रखने वाला है।}[अल अनआमः 65].

”अल क़दीर“.. वह पूर्ण शक्ति वाला है,उस ने अपनी शक्ति से संसार को वजूद बखशा और अपनी ही शक्ति से संसार वालों के लिये उपाय किया और अपनी ही शक्ति से उस ने संसार को बराबर और मज़बूत बनाया,और वह अपनी ही शक्ति से मारता और जिलाता है और बंदों को मरने के बाद दोबारा जीवित करेगा,नेक लोगों को उन की नेकी का और बुरोें को उन की बुराई का बदला देगा,अल्लाह तआला जब किसी चीज़ का इरादा करता है तो कहता है हो जा,पस वह चीज़ हो जाती है,और वह अपनी शक्ति से दिलों को उलटता पलटता है और जिस प्रकार चाहता है दिलों में उलट फेर करता है।

”अल मुक़्तदिर“

वह मज़बूत ताक़त वाला है,जिस पर जैसा चाहता है शक्ति रखता है।

”अल क़ादिर“

पूर्ण शक्ति वाला है,उस ने जीवित किया और मौत दी,मखलूक़ को वजूद बखशा,उन के लिये उपाय किया और उसे मज़बूत बनाया ।

”अल क़दीर“

वह अपनी शक्ति से लोगों को दोबारा जीवित करेगा और उन्हें बदला देगा,और वह जैसा चाहता है दिलों में उलट पलट करता है।

”अल मुक़्तदिर“

वह मज़बूत ताक़त वाला है,जिस पर जैसा चाहता है शक्ति रखता है।

”अल क़ादिर“

पूर्ण शक्ति वाला है,उस ने जीवित किया और मौत दी,मखलूक़ को वजूद बखशा,उन के लिये उपाय किया और उसे मज़बूत बनाया ।

”अल क़दीर“

वह अपनी शक्ति से लोगों को दोबारा जीवित करेगा और उन्हें बदला देगा,और वह जैसा चाहता है दिलों में उलट पलट करता है।


अल्लाह तआला अल वारिस है..

बेशक अल्लाह तआला अल वारिस है.. {और हम ही जिलाते और मारते हैं,और हम ही वारिस हैं“।}[अल हिज्रः 23].

”अल वारिस“

वह धरती और धरती की सब चीज़ों का वारिस है,और अल्लाह तआला के अतिरिक्त कोई चीज़ बाक़ी रहने वाली नहीं है।

”अल वारिस“

वह अपनी मखलूक़ के फना हो जाने के बाद अपनी बादशाहत की पूर्णता के कारण बाक़ी रहने वाला है,क्योंकि सब बादशाहतें उसी की मुहताज हैं। वह ज़ालिमों अहंकारियों और सरकशों को यह कह कर डराता है कि उन्हें अल्लाह तआला ही की ओर लौटना है,इस लिये कि वही सत्य वारिस है।

”अल वारिस“

अल्लाह तआला अपने बंदों को अपनी राह में खर्च करने पर उभारता है,क्यांेकि धन आरज़ी है और आयु खतम होने वाली, और सब लोगों को बाक़ी रहने वाले अल्लाह की ओर लौटना है।

”अस्समी अल बसीर“..

वह तेरी बातें सुनता है,तो अपना हिसाब स्वयं लो,वह तुम्हारी प्रार्थना सुनता है तो तुम उस के सामने गिड़गिड़ाओ,वह तुम्हारे आमाल को देखता है,कोई छोटी सी छोटी चीज़ उस से छुपी नहीं है,इस लिये अच्छे कार्य करो,निःसंदेह अल्लाह तआला अच्छे कार्य करने वालों को प्रिय रखता है।

”अल वारिस“

वह अपने बंदों को अपनी नाशुक्री से रोकता है,क्यांेकि नेमत उसी की ओर से है और नेमतांे को उसी की ओर लौटना है।

”अल वारिस“

धरती और धरती में पाई जाने वाली सब चीज़ों का वह मालिक है,और हर एक चीज़ को अतिरिक्त उस के खतम होना है,तो उसी की ज़ात बाक़ी रहने वाली हुयी और वही असली वारिस हुआ। {और हम ही हैं सब कुछ के वारिस“।[अल क़ससः 58].

बेशक अल्लाह तआला ही अल वारिस है..


अल्लाह तआला अस्समी और अल बसीर है..

बेशक अल्लाह तआला अस्समी और अल बसीर है...

हे सुनने वाले हमारी दुआयंे सुन ले और हमारी पुकार क़बूल कर ले,तु हमारे आमाल,हमारी कोताहियाँ को देखने वाला है,अथवा तू यह भी देख रहा है कि हम केवल तेरी अकेली ज़ात के मुहताज हैं।

”अल्लाह तआला अस्समी है“

वह हर कमज़ोर और शक्तिमान की आवाजंे़ सुनता है,उस को एक आवाज़ दूसरी आवाज़ से और एक माँगने वाला दूसरे माँगने वाले से बे खबर नहीं करता है।

”अल्लाह तआला अल बसीर है“

वह हर चीज़ को देखता है,चाहे वह छोटी हो या बड़ी,या वह रात में छुपी हो अथवा दिन मंे हो।

”अस्समी“

अनेक भाषाओं और अनेक आवश्यक्ताओं के होने के बावजूद वह सब की बातें सुनता है।

”अल बसीर“

ठोस पत्थर पर काली रात में काली चींटी के क़दमों को वह देखता है,और वह सात ज़मीनों के नीचे रहने वाली चीज़ों को उसी प्रकार देखता है जिस प्रकार वह सात आसमानों के ऊपर वाली चीज़ों को देखता है।

”अस्समी अल बसीर“

उस से कोई चीज़ ढकी छुपी नहीं है,और न ही वह किसी चीज़ से ग़ाफिल है।

बेशक अल्लाह तआला अस्समी और अल बसीर है..


अल्लाह तआला अश्शाकिर और अश्शकूर है..

बेशक अल्लाह तआला अश्शाकिर और अश्शकूर है..

बेशक अल्लाह तआला अश्शकूर है..

{बेशक अल्लाह तआला सम्मान करने वाला और जानने वाला है“।}[अल बक़राः 158].

{बेशक हमारा रब बड़ा माफ करने वाला और क़दर करने वाला है“।}[फातिरः 34].

अल्लाह तआला छोटे से छोटे अमल की क़द्र करता है, और अधिकतर गलतियों को क्षमा कर देता है,और इख्लास वालों के अमलों को बिना हिसाबो किताब कई गुना बढ़ा देता है।

”अल्लाह तआला अश्शकूर है“

जो शुक्र अदा करता है उसे देता है,और माँगने वाले पर करम करता है,और जो उसे याद करता है वह भी उसे याद करता है,तो शुक्रगुज़ार के लिये अधिक है और नाशुक्रे के लिये घाटा और नुक़सान है, अल्लाह तआला ने कहाः {अगर तुम शुक्रिया अदा करोगे तो बेशक मैं तुम्हंे अधिक दूँगा,और अगर तुम नाशुक्रे होगे तो निश्चय मेरा सख्त अज़ाब है“।}[इब्राहीमः 7].

बेशक अल्लाह तआला अश्शाकिर और अश्शकूर है..


अल्लाह तआला अल हमीद(प्रशंसा के योग्य) है..

बेशक अल्लाह तआला अल हमीद है

अल्लाह तआला अपनी ज़ात मंे अपने कार्यों में,अपने स्वभाव में और अपने कथनों में प्रशंसा के योग्य है,इस संसार में अल्लाह के अतिरिक्त कोई प्रशंसा के योग्य नहीं,स्तुति और संपूर्ण प्रशंसा अल्लाह तआला के लियेे है“

अल हमीद

अल्लाह तआला अपनी ज़ात में,अपनी विशेषताओं में और अपने कार्यों में प्रशंसा के योग्य है,उस के लिये अच्छे अच्छे नाम हैं,और उस के लिये अधिक पूर्ण विशेषतायें हंै और खूबसूरत कारनामे हैं,क्योंकि अल्लाह तआला के कारनामे उस के करम और न्याय पर आधारित हैं।

तेरे ही लिये सब तारीफें हैं कि तू ने हमारे पास अपनी किताब उतारी,और हमें अपनी महिमा की पहचान करवाई और हमारी ओर अपने रसूल मुहम्मद को भेजा।

बेशक अल्लाह तआला प्रशंसा के योग्य है“


अल्लाह तआला अल मजीद,अल कबीर, अल अज़ीम और अल जलील है..

बेशक अल्लाह तआला अल मजीद,अल कबीर,अल अज़ीम और अल जलील है..

बेशक अल्लाह तआला की ज़ात में महिमा, बड़ाई,महानता और प्रतापवान(जलाल) की विशेषतायें पाई जाती हैं,वह हर चीज़ से बड़ा और हर चीज़ से अधिक महान, शक्तिशाली और बुलंद है,उसी के लिये उस के नेक और चुने बंदों के दिलों में सम्मान और इज़्ज़त है,निःसंदेह उन के दिल अल्लाह तआला की ताज़ीम,सम्मान,इज़्ज़त और आजज़ी एवं नम्रता से भरे हैं,ऐ महान रब!! तेरी ज़ात पाकीज़ा है और तू अधिक अज़ीम है।

ऐ महान!! तेरी ज़ात पाकीज़ा है और तू बहुत बड़ा है!! {तो तू अपने महान रब के नाम की पविन्नता बयान कर“।}[अल वाक़ेआः 96].

हम तेरी प्र्रशंसा और महानता को गिन ही नहीं सकते,ऐ बडे़, बुलंद शान और ऐ प्रतापवान(जलाल) और इज़्जत वाले।

अल्लाह तआला अपनी महान ज़ात और अपने नामों और विशेषताओं में विराट है.. {उस जैसी कोई चीज़ नहीं“।}[अश्शूराः 11].

अल्लाह तआला प्रतापवान(जलाल) और महानता वाला है,जो कोई उस में से किसी भी चीज़ के अन्दर अल्लाह तआला से झगड़ा करे तो अल्लाह तआला उस को तोड़ देगा,जैसा की हदीसे कुदसी में हैः «बड़ाई मेरी चादर है,और महानता मेरी लुंगी,अगर इन दोनों में से किसी एक में भी कोई मुझ से झगड़ा करे,तो मैं उसे नर्क में डाल दूँगा» (अह्मद).

बेशक अल्लाह तआला अल मजीद,अल कबीर,अल अज़ीम और अल जलील है..


अल्लाह तआला अल अली,अल आला और अल मुतआल है..

बेशक अल्लाह तआला अल अली,अल आला और अल मुतआल है..

” अल अली,अल आला और अल मुतआल“

अल्लाह तआला के लिये हर प्रकार की बुलंदी है,ज़ाती बुलंदी,शक्ति और विशेषताओं की बुलंदी,और गलबा पाने की बुलंदी है

{और वह तो बहुत महान और बहुत बड़ा है“।}[अल बक़राः 255].

अल्लाह तआला अर्श पर मुस्तवी है,और वह महानता,बड़ाई,प्रतापवान,सुंदरता की विशेषताओं और अधिकतर पूर्णता से मुत्तसिफ है,और ये सारे कमाल उसी पर खतम हैं।

”अल अली,अल आला“

अल्लाह तआला हर उस अैब से बुलंद व बाला है जो उस की शान के योग्य नहीं,और वह हर प्रकार की कमी और संदेह से दूर है,वह अपनी ज़ात,विशेषताओं,और ग़लबा के ज़रिये बुलंद व बाला है,अर्थात अल्लाह तआला अधिकतर महान है।

बेशक अल्लाह तआला अल अली,अल आला और अल मुतआल है..


अल्लाह तआला अल क़ाबिज़ और अल बासित है..

बेशक अल्लाह तआला अल क़ाबिज़(तंगी करने वाला) और अल बासित(कुशादगी करने वाला) है..

”अल्लाह तआला अल क़ाबिज़ है“

वह कुछ क़ौमों की रोज़ी तंग कर देता है ताकि उन की परिक्षा ले,और कुछ की रोज़ी रोक लेता है ताकि उन्हें विजित(मगलूब) करे,और कुछ क़ौमों की रोज़ी को महफूज़ रखता है ताकि उन के दरजों को ऊँचा करे।

”अल्लाह तआला अल बासित है“

अल्लाह तआला रोज़ी कुशादा करता है,और दिलों के ज्ञान में भी कुशादगी करता है,और यह सब उस की हिक्मत,दयालुता,उस के करम और उस की उदारता के तक़ाज़ा अनुसार हैं।

बेशक अल्लाह तआला अल क़ाबिज़(तंगी करने वाला) और अल बासित(कुशादगी करने वाला) है..


अल्लाह तआला अल मूअती(देने वाला) और अल माने(मना करने वाला) है“

बेशक अल्लाह तआला अल मूअती (देने वाला) और अल माने(मना करने वाला) है“

अल्लाह तआला अल मूअती(देने वाला) और अल माने(मना करने वाला) है“

जिस को अल्लाह तआला दे उस को कोई रोकने वाला नहीं,और जिस को रोक ले उस को कोई देने वाला नहीं,सब हितों और लाभों को उसी से माँगा जाता है,और उसी से आशा की जाती है,वही है जिसे चाहता है देता है,और अपनी हिक्मत और दयालुता की बुनियाद पर जिस से चाहे रोक लेता है।

हे अल्लाह! हे विशाल (कुशादा) करने वाली ज़ात,अपनी रहमतें हमारे ऊपर विशाल कर दे,और हमें अपना दान प्रदान कर,और ऐ रोकने वाले!हम से बुराइयों को रोक ले,और ऐ मना करने वाले हम से झगड़ा फसाद को दूर कर दे।

बेशक अल्लाह तआला अल मूअती(देने वाला) और अल माने(मना करने वाला) है“ संपूर्ण प्रशंसा अल्लाह तआला के लिये है,वह उसी प्रकार है जिस प्रकार स्वयं उस ने अपने विषय में बयान किया है,और जिस प्रकार मखलूक ने उस के विषय में बयान किया है उस से कहीं अधिक ऊपर है।

इमाम शाफई