अल्लाह पर ईमान का अर्थ और उस की वास्तविकता (ह़क़ीक़त)1

अल्लाह पर ईमान का अर्थ और उस की वास्तविकता (ह़क़ीक़त)1

अल्लाह पर ईमान का अर्थ और उस की वास्तविकता (ह़क़ीक़त)ः

सच्चे ईमान में रूहों का जीवन और अधिक प्रसन्नतायें हैं

सर्वशक्तिमान अल्लाह पर ईमान लाने में ही आत्मा (रूह) की खुशी है,ईमान न लाने वाली आत्मा डरी हुयी भटकी और कमज़ोर रहती है जिसे स्थिरता प्राप्त नहीं होती,और अल्लाह पर ईमान लाने में ही मुक्ति (निजात) है,इस का अर्थ हैः सच्चा विश्वास रखना कि अल्लाह तआला ही हर चीज़ का रब,बादशाह और पैदा करने वाला है, वही इस बात का हक़दार है कि संपूर्ण इबादतें जैसे नमाज़, रोज़ा, दुआ, आशा,डर,हीनता (जि़ल्लत) नम्रता उसी के योग्य हैं,और उस में संपूर्ण विशेषतायें पाई जाती हैं,वह सर्वशक्तिमान अल्लाह हर दोष और हर कमी से पवित्र है।

और अल्लाह पर ईमान लाने में यह भी शामिल है कि उस के फरिशतों,उस की किताबों,उस के संदेशवाहकों,प्रलोक और तक़्दीर की अच्छाई और बुराई पर ईमान लाया जाये,और इसी प्रकार ईमान में सही मानव की खुशी है,बल्कि यही मोमिन की दुनियावी स्वर्ग (जन्नत) है और यदि अल्लाह ने चाहा तो उसे मरने के बाद स्वर्ग मिलेगा।

”शरीअत में ईमान कहते हैं: दिल से विश्वास रखने,जु़बान सेे इक़रार करने और शरीर के अंगों (आज़ा) से अमल करने को,ईमान आज्ञाकारित (इताअत) से बढ़ता है और पाप करने से घटता है। “.

जब इस का ज्ञान हो गया तो जानना चाहिये कि कर्म (अमल) के स्वीकार्य का आधार ईमान ही है अल्लाह तआला के फरमान की वजह सेः {जो नेक काम करे और वह मोमिन (एकेश्वरवादी)भी हो“।}[अल हज्जः 94].

ईमान का महत्व

निःसंदेह सर्वश्रेष्ठ और अधिक पवित्र काम अल्लाह के समीप अल्लाह पर ईमान लाना है अबूज़र की हदीस की वजह से जिस में उन्होंने नबी से पूछाः «ऐ अल्लाह के रसूल! कौन सा अमल सर्वश्रेष्ठ है? आप ने फरमायाः अल्लाह पर ईमान लाना और उस के मार्ग में जिहाद करना» (मुस्लिम).

यह मार्गदर्शन,और दुनियावी एवं बाद में आने वाली जि़न्दगी (प्रलोक) की खुशी का कारण है,सर्वशक्तिमान अल्लाह के फरमान की वजह सेः {जिस को अल्लाह सच्चा रास्ता दिखाना चाहता है उस के सीने को इस्लाम के लिये खोल देता है“।}[अलअन्आमः125].

और ईमान मोमिन को गुनाह से रोकता है, सर्वशक्तिमान अल्लाह के फरमान की वजह सेः {बेशक जो लोग (अल्लाह से) डरते हैं जब उन को कोई शक शैतान की तरफ से आ जाता है तो वह याद में लग जाते हैं इस लिये अचानक उन की आँखंे खुल जाती हैं“।}[अलआराफः201].

अमल स्वीकार्य होने के लिये ईमान शर्त है, अल्लाह तआला ने फरमायाः {और बेशक तेरी तरफ भी और तुझ से पहले (के सभी नबियों) की तरफ भी वह्य की गई है कि अगर तू ने शिर्क किया तो बेशक तेरा अमल बर्बाद हो जायेगा और निश्चित रूप से तू नुक़्सान उठाने वालों में से हो जायेगा“।}[अज़्जु़मरः65].

शुद्व ईमान के कारण अल्लाह तआला अमल को बरकत वाला बनाता है और दुआओं को क़बूल करता है। {और बेशक तेरी तरफ भी और तुझ से पहले (के सभी नबियों) की तरफ भी वह्य की गई है कि अगर तू ने शिर्क किया तो बेशक तेरा अमल बर्बाद हो जायेगा और निश्चित रूप से तू नुक़्सान उठाने वालों में से हो जायेगा“।}[अज़्जु़मरः65].


ईमान के फल

अल्लाह तआला फरमाता हैः {क्या आप ने नहीं देखा कि अल्लाह (तआला) ने पाक बात की मिसाल(उदाहरण)एक पविन्न पेड़ जैसा बयान किया जिस की जड़ मज़बूत है और जिस की शाखायें आकाश में हैं,जो अपने रब के आदेश से हर समय अपने फल लाता है“।}[इब्राहीमः24-25].

ईमान के फल निम्न लिखित हैंः

1- सच्चा ईमान सूकून,मनोवैज्ञानिक आराम और तसल्ली प्रदान करता है,और इस पर अल्लाह तआला का यह कथन फिट बैठता हैः {याद रखो कि अल्लाह के मिन्नों पर न कोई डर है न वे दुखी होते हैं“।}[यूनुसः62].

2- मोमिनों को अल्लाह तआला की खास संगति प्राप्त होती है,अर्थात वह उन को कुफ्र के अंधेरे और उस के परिणाम से निकाल कर ईमान की रोशनी और उस के सवाब की ओर ले जाता है।

3- अल्लाह की प्रसन्नता और उस स्वर्ग का पाना जिसे अल्लाह तआला ने उस व्यक्ति के लिये तय्यार की है जो ईमान लाये और उस की पुष्टि करे,सर्वशक्तिमान अल्लाह ने कहाः {इन ईमानदार मर्दो और औरतांे से अल्लाह (तआला) ने उन जन्नतों का वादा किया है जिन के नीचे नहरें बह रही हैं,जहां वे हमेशा रहने वाले हैं और उन पाकीज़ा घर का जो उन खत्म न होने वाले जन्नत में हैं और अल्लाह की खुशी है“।}[अत्तोबाः72].

4-अल्लाह तआला का अपने मिन्नों,अपनी पार्टी और अपने मोमिन बंदो का बचाव करनाः {बेशक अल्लाह (तआला) ईमान वालों के दुश्मनों को खुद हटा देता है“।}[अल हज्जः38].

उदाहरण के तौर परः अल्लाह तआला का अपने नबी मुहम्मद का उन की हिज्रत के समय बचाव करना और सर्वशक्तिमान अल्लाह तआला का खलील इब्राहीम का बचाव करना उस समय जब उन्हें आग में डाल दिया गया था।

5- दीन में महानता और इमामत प्राप्त होती है, सर्वशक्तिमान अल्लाह ने कहाः {और हम ने उन में से चूंकि उन लोगों ने सब्र किया,ऐसे अगुवा बनाये जो हमारे आदेश से लोगों की हिदायत करते थे“।}[अस्सज्दाः24].दीनदार और अल्लाह पर यक़ीन करने वाले इस की जीवित मिसाल(उदाहरण)हैं,अल्लाह तआला ने उन की याद और उन के कारनामों को सदा के लिये बाक़ी रखा जब कि वे ज़मीन के तह में दफन हैं,वे हम में नहीं हैं पर उन के प्रभाव और उन की खबरें जीवन में मौजूद हैं।

अल्लाह पर ईमान लाना कमज़ोर व्यक्ति और उस के रब के बीच सम्बंध है जबकि शक्तिमान व्यक्ति अपनी शक्ति को उसी (अल्लाह) से प्राप्त करता है। बिना ईमान के जीवन अपरिहार्य मरना है.. बिना ईमान के आँख अंधी है.. बिना ईमान के जु़बान गूँगी है.. बिना ईमान के हाथ पंगु (शल) है..

6- अल्लाह तआला का मोमिनों से प्रेम करना, अल्लाह तआला ने कहाः {वे अल्लाह के प्यारे होंगे और वे भी अल्लाह से प्यार करते होंगे“।}[अलमायदाः54].

और फरमायाः {बेशक जो ईमान लाये हैं और जिन्होंने नेक अमल किये हैं उन के लिये अल्लाह रहमान मुहब्बत पैदा कर देगा“।}[मरयमः96].

7- लोक प्रलोक में अच्छा जीवन, सर्वशक्तिमान अल्लाह ने कहाः {जो इंसान नेकी के काम करे मर्द हो या औरत और वह ईमान वाला हो तो हम उसे बेशक सब से अच्छी जि़न्दगी देंगे और उन के नेकी के कामों का अच्छा बदला भी उन्हें ज़रूर देंगे“।}

[अन्नहलः97].तो अच्छे जीवन और खुशी ढूँडने वाले कहाँ हैं?!!

8- अल्लाह की मुहब्बत मोमिन के लिये है और मोमिन की मुहब्बत अल्लाह के लिये, सर्वशक्तिमान अल्लाह फरमाता हैः {यह अल्लाह के प्यारे होंगे और वे भी अल्लाह से प्यार करते होंगे“।}[अलमायदाः54].

अर्थात वह उन से प्रेम करता है और लोगों के दिलों में उन के लिये प्रेम डाल देता है.

9- अल्लाह तआला की गरिमा से मोमिनों के लिये शुभसमाचार का प्राप्त होना है,सर्वशक्तिमान अल्लाह फरमाता हैः {और ईमान वालों को खुशखबरी सुना दीजिये“।}[अत्तोबाः112].

और शुभसमाचार महान चीज़ के कारण ही होता है जिस का प्रभाव त्वचा पर पड़ता है, इसी कारण इसे शुभसमाचार कहा जाता है,और सर्वशक्तिमान अल्लाह की दया,उस की प्रसन्नता,उस के स्वर्ग से अधिक बड़ी चीज़ कुछ भी नहीं हो सकती, सर्वशक्तिमान अल्लाह फरमाता हैः {और ईमान वालों और नेक काम करने वालों को उन स्वर्गांे की खुशखबरी दो जिन के नीचे नहरें बह रही हैं“।}[अलबक़राः25].

10- ईमान स्थिरता का कारण है, सर्वशक्तिमान अल्लाह फरमाता हैः {जिन से लोगों ने कहा कि लोग तुम्हारे लिये जमा हो चुके हैं इस लिये उन से डरो तो उन का ईमान बढ़ गया और कहा कि अल्ला हमारे लिये बस है वह सब से अच्छा संरक्षक(वली) है“।}[आले इमरानः173].

संदेशवाहकों,सहाबा,ताबईन और उन के अनुयायियों का बलिदान इस स्थिरता का सबूत है।

11- उपदेश से लाभ उठाना, सर्वशक्तिमान अल्लाह फरमाता हैः {और शिक्षा (नसीहत) देते रहंे बेशक यह शिक्षा ईमान वालों को लाभ पहुंचायेगी“।}[अज़्ज़ारियातः55].

ईमान वाले ही वाज़ो नसीहत से लाभ उठाते हैं.

मोमिन के लिये हर हाल में भलाई रख दी गई है कुशादगी और तंगी दोनों हाल में खैर मोमिन के संग होता है,अल्लाह के रसूल ने कहाः «मोमिन की दशा कितनी अच्छी है कि उस के सब कार्य उस के लिये भलाई के कार्य हैं,यह विशेषता केवल मोमिन को ही प्राप्त है कि जब उसे कोई खुशी पहुंचती है तो वह शुक्र अदा करता है, यह उस के लिये अच्छा है तथा जब कष्ट पहुंचता है तो वह सब्र करता है तो यह भी उस के लिये अच्छा है।» (मुस्लिम),

ईमान मोमिन को कष्ट में सब्र और खुशी में शुक्र पर उभारता है।

13- बड़े पाप (गुनाह) में पड़ने से हिफाज़त,नबी की सही हदीस में आया हैः «व्यभिचारी (जि़नाकार) व्यभिचार करने की हालत में मोमिन नहीं रहता».. (बुखारी).

यह महान ईमान के महान फल हैं,खुशी, मन की शान्ति,और सूकून चैन ढूँडने वाले कहाँ हैं?

ईमान के प्रभावः

मेमिन के जीवन में ईमान के प्रभावः

मेमिन के जीवन में ईमान के प्रभावः {ईमान वालों का कहना तो यह है कि जब उन्हंे इस लिये बुलाया जाता है कि अल्लाह और उस का रसूल उन में फैसला करदे तो वह कहते हैं कि हमने सुना और मान लिया,यही लोग कामयाब होने वाले हैं“।}[अन्नूरः51].ईमान मोमिन को अल्लाह के आदेश का पालन और उस की ताबेदारी करने में जल्दी करने पर उभारता है।

अल्लाह पर ईमान लाना जीवन है और अल्लाह के साथ जीवन ईमान है.

अल्लाह तआला फरमाता हैः {तो क़सम है तेरे रब की यह (तब तक) ईमान वाले नहीं हो सकते जब तक कि सभी आपस के इख्तिलाफ में आप को फैसला करने वाला न कु़बूल कर लें,फिर जो फैसला आप कर दें उन से अपने दिलों में ज़रा भी तंगी और नाखुशी न पायें और फरमाँबरदार की तरह कु़बूल कर लें“।}[अन्निसाः65].

बल्कि ईमान मोमिन को स्वीकरण और अल्लाह के आदेश से संतुष्टि होने पर उभारता है।

2- अल्लाह तआला का स्पष्ट और गुप्त दोनों प्रकार के शिर्क से अपने बंदे का बचाव,अर्थात अल्लाह के अतिरिक्त से न तो दुआ करना न ही उस से सहायता या दुहाई माँगना,क्यांेकि सर्वशक्तिमान अल्लाह ही लाभ और हानि का मालिक हैः {और अगर अल्लाह (तआला) तुझ को कोई तक्लीफ दे तो उस को दूर करने वाला अल्लाह तआला के सिवाय कोई दूसरा नहीं है“।}[अलअन्आमः17].

3-अल्लाह तआला के लिये प्रेम और उसी के लिये घृणा करना,और यही ईमान की शक्तिशाली कड़ी है, सर्वशक्तिमान अल्लाह फरमाता हैः {सभी मुसलमान भाई भाई हैं“।}[अल हुज्रातः10].

इस का सब से अच्छा उदाहरण अन्सार का मुहाजिरीन को अपना भाई बनाना और अपने भाइयों के लिये धन और पराण की कु़रबानी देना है,निर्दोष मुहम्मद ने कहाः «तुम में से कोई व्यक्ति मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिये वही न पसंद करे जो अपने लिये पसंद करता है» (बुखारी).

”ऐ ईमान वालो! (पूरे तौर पर) मोमिन बन जाओ“। ईमान के महान स्थान के कारण मोमिनों को उस की ओर बुलाना और उन्हें इस पर उभारना.

4- अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने पर सब्र करना,और प्रिय और उत्तम चीज़ खर्च करना ताकि अल्लाह तआला प्रसन्न हो जाये,अल्लाह तआला फरमाता हैः {ईमान वाले तो वह हैं जो अल्लाह पर और उस के रसूल पर (मज़बूत) ईमान लायें,फिर शंका-संदेह न करें और अपने माल से और अपनी जान से अल्लाह के रास्ते में धर्मयुद्व (जिहाद) करते रहें,यही लोग सच्चे हैं“।}[अल हुज्रातः15].

5- अल्लाह,उस के वादों,और जो कुछ उस के पास है उस से दिल का जुड़ना अथवा उस से प्रसन्न होना,उस के लिये,अल्लाह पर ईमान लाना और उस की बंदगी करना मोमिन के लिये स्वर्ग समान है, और वह प्रलोक के स्वर्ग की आशा रखता है जिस का वादा अल्लाह तआला ने उस से कर रखा है,बल्कि मोमिन को जो भी थकावट,बीमारी और परेशानी पहुँचती है उस पर वह अल्लाह से सवाब और अपने आमाल की किताब में लिखे जाने की उम्मीद रखता है, अल्लाह तआला फरमाता हैः {मदीना और उस के आस पास गाँव वालों के लिये ठीक न था कि रसूलुल्लाह का साथ छोड़ कर पीछे रह जायें न यह कि अपनी जान को उन की जान से ज़्यादा प्यारा समझें,यह इस कारण कि उन को अल्लाह की राह में जो प्यास लगी और जो थकान पहुँची और जो भूक लगी और जो चलना चले,जो काफिरों के लिये क्रोध का कारण बना हो,और दुश्मनों की जो कुछ खबर ली,उन सब पर उन के नाम नेक काम लिखा गया,बेशक अल्लाह तआला नेकों का बदला बरबाद नहीं करता,और जो भी छोटा और बड़ा उन्होंने खर्च किया और जितने मैदान उन को पार करने पड़े,यह सब भी उन के नाम लिखा गया ताकि अल्लाह उन के कामों का अच्छे से अच्छा बदला अता करें“।}[अत्तोबाः120-121].

यह सब अल्लाह तआला पर ईमान और उस के मामले में सत्य अपनाने वालों के लिये है.

6- अल्लाह और उस के रसूल की विलायत का प्राप्त होना, अल्लाह तआला फरमाता हैः {तुम्हारा दोस्त खुद अल्लाह,उस के रसूल और ईमान लाने वाले हैं“}[अल माइदाः55].

अल्लाह की दोस्ती का अर्थ, अर्थात अल्लाह तअला से मुहब्बत, उस के दीन की मदद,उस के दोस्तों से प्रेम करना है और जो इस के विपरित हैं उस से मुक्ति होना है, क्योंकि वे अल्लाह के दुश्मन हैं,सर्वशक्तिमान अल्लाह कहता हैः {अल्लाह पर और क़यामत के दिन पर ईमान रखने वालों को आप अल्लाह और उस के रसूल के विरोधियों से प्रेम करते हुये कभी नहीं पायंेगे चाहे वे उन के पिता या उन के पुन्न या उन के भाई या उन के सम्बन्धी ही क्यांे न हों,यही लोग हैं जिन के दिल में अल्लाह ने ईमान लिख दिया है और जिनकी पुष्टि अपनी आत्मा (रूह) से की है और जिन को उन स्वर्गों में प्रवेश (दाखिला) देगा जिन के नीचे पानी की नहरें बह रही हैं,जहाँ यह हमेशा रहंेगे,अल्लाह उन से खुश है और यह अल्लाह से खुश हैं, यह अल्लाह की सेना है,जान लो कि बेशक अल्लाह के गिरोह वाले ही कामयाब लोग हैं“।}[अल मुजादलाः22].

बल्कि मोमिन तो अल्लाह, उस के मैसेंजर, और मोमिनों को दोस्त रखता है, और वह काफिरों को बिल्कुल दोस्त नहीं रखता, सर्वशक्तिमान अल्लाह कहता हैः {मोमिनों को चाहिये कि ईमान वालों को छोड़ कर काफिरों को अपना दोस्त न बनायें“।}[आले इमरानः28].

7- अच्छे आचार की प्राप्ति,नबी से साबित है आप ने फरमायाः

4- अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने पर सब्र करना,और प्रिय और उत्तम चीज़ खर्च करना ताकि अल्लाह तआला प्रसन्न हो जाये,अल्लाह तआला फरमाता हैः {ईमान वाले तो वह हैं जो अल्लाह पर और उस के रसूल पर (मज़बूत) ईमान लायें,फिर शंका-संदेह न करें और अपने माल से और अपनी जान से अल्लाह के रास्ते में धर्मयुद्व (जिहाद) करते रहें,यही लोग सच्चे हैं“।}[अल हुज्रात:15].

और लज्जा महानतम स्वभाव में से है,मोमिन अपने भाइयों के संग अपने स्वभाव को अच्छा करता है ताकि संासारिक जीवन के आनंद में कोई समस्या कोई विभेद और कोई झगड़ा न हो...यह सारी बातेें इस लिये क्यांेकि यह मोमिन है और यह विशेषतायें मोमिन के लिये खास हैं.

8- सच्चा सुख और मनोवैज्ञानिक आराम यह ऐसी चीज़ है जिस के कारण वह महसूस करता है कि उसे दुनियावी जन्नत में प्रसन्नता (खुशी) और मनोशांति मिल रही है, क्यांेकि उस का रब एक है और वह सर्वशक्तिमान अल्लाह है,उस के नबी एक हैं और वह मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह हैं,उस का मन्हज एक है और वह है अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति और उस का लक्ष्य (हदफ) एक है और वह स्वर्ग है जिस की चैड़ाई आकाशों और पृथ्वी के समान है.

और जब आप दायें और बायें देखें और आप को दिखे कि मनोरोग क्लीनिक रोगियों से भरा पड़ा है, और आप को शिकायतें,चिंतायें संकट,अनिद्रा,नींद की कमी,चिंतन,डर और बुरे सपने सुनाई दें तो आप अच्छी तरह जान लें कि यह सब सर्वशक्तिमान अल्लाह पर ईमान से दूरी और दुनिया से अधिक रिश्ता

नाता जोड़ने के कारण है,भौतिकवाद रूहानी पहलू पर भारी पड़ रहा है, और रूहानी पहलू को संतुष्ट करने के लिये मानव को अधिक अवश्यक्ता है, और यह चीज़ बिना सर्वशक्तिमान अल्लाह पर ईमान,उस के संग तअल्लुक़ जोड़ने, सदा उस का जि़क्र करने,फरिश्तों,(आसमानी)किताबों,संदेश्वाहकों,प्रलोक और अच्छी,बुरी,मीठी कड़वी तक़्दीर पर ईमान लाने के बिना प्राप्त नहीं हो सक्ता।

महत्वपूर्ण यह है कि अधिकतर लोग दिल की दवा,और दिली सुकून से ग़ाफिल हैं,वे दुनिया की जन्नत से ग़ाफिल हो कर खतम होने वाली दुनिया के मलबे के पीछे पडे़ हुये हैं,न तो यह लोग वह कर सकते हैं जिसे चाहते हैं और न ही पहले रास्ते पर चल कर इन्हें आराम मिल पा रहा है.

और रूहानी सुकून ईमान के बिना नहीं मिल सकता, क्यांेकि आत्मा अल्लाह की ओर से है और शरीर को अल्लाह तआला ने मिट्टी से बनाया है,पस जब जब रूहानी पहलू को संतुष्टि प्राप्त होगी तो आप का नफ्स ऊँचाई की ओर बढ़ेगा,परवान चढ़ेगा,उसे शान्ति मिलेगी और वह तुच्छ चीज़ों की परवाह नहीं करेगा,और जब जब रूहानी पहलू में कमी होगी आप का नफ्स कामज हैवानी फित्रत की और लुढ़क जायेगा और उस की तंगी अथवा परेशानी बढ़ जायेगी, और स्वयं उस की निगाह में दुनिया अंधेरी हो जायेगी।


अल्लाह का परिचय कराने वाले रसूलों पर ईमानः

अल्लाह तआला ने अपने बंदों को बेकार नहीं पैदा किया और न उन्हें व्यर्थ छोड़ा,इसी कारण उन के पास ऐसे संदेष्टा भेजे जिन्होंने अल्लाह तआला की शक्तियों,उस की पूर्णता और उस की शरीअत का परिचय करवाया,और अल्लाह तआला ने सर्वाेत्तम इंसानों को भेजा,जिन में से अधिक रसूल भेजे जैसे नूह,इब्राहीम,मूसा,ईसा अलैहिमुस्सलाम,और ईशदौत्य(रिसालत)को सर्वश्रेष्ठ संदेष्टा मुहम्मद के ज़रिये पूरा किया,और संदेशवाहकों को वह सब निशानियाँ (मोजज़ात) दीं जो उन की सच्चाई को प्रमाणित करती हैं,उन्होंने अमानत की तब्लीग़ की,ईशदौत्य (अल्लाह के पैग़ाम) को पहँुचाया और लोगों को उन के रब और पैदा करने वाले से परिचय करवाया,इस लिये जिस ने इन की ईशदौत्य और उन की सत्यता को नहीं स्वीकारा उस ने अल्लाह को भी नहीं स्वीकारा,अल्लाह तआला ने फरमायाः {रसूल उस चीज़ पर ईमान लाये जो उस की तरफ अल्लाह (तआला) की ओर से उतारी गयी और मुसलमान भी ईमान लाये,यह सब अल्लाह (तआला) और उस के फरिश्तों पर और उस की किताबों पर और उस के रसूलों पर ईमान लाये“।}[अल बक़राः285].

तो सब के सब नबी और रसूल अल्लाह की ओर से भेजे गये, हम उन सब पर ईमान लाते हैं,अल्लाह तआला ने फरमायाः {उस के रसूलों में से किसी के बीच हम फर्क़ नहीं करते।}
[अल बक़राः285].

और अल्लाह तआला ने रसूलों पर किताबें उतारीं ताकी वह मानव के लिये रोशनी बनें अर्थात उन की मार्गदर्शक कर सकंे,इब्राहीम को सहीफे दिये गये,दाऊद को ज़बूर,मूसा को तौरात,ईसा का इंजील अलैहिमुस्सलाम, और मुहम्मद को मोजज़ाती किताब कुरआन दिया, अल्लाह तआला ने फरमायाः

{यह एक ऐसी किताब है कि इस की आयतें मज़बूत की गयी हैं फिर मुफस्सल बयान की गई हैं एक हिक्मत वाले पूर्णज्ञान वाले की ओर से“।}[हूदः1].

और अल्लाह तआला ने इसे मार्गदर्शन,प्रकाश,अधिकता(बरकत वाला)और प्रमाण बनाया,अल्लाह तआला ने फरमायाः {और यह (पाक कु़रआन) एक मुबारक किताब है जिसे हम ने उतारा,इस लिये कि तुम इस की इŸोबा करो और अल्लाह से डरो ताकि तुम पर दया की जाये“।}
[अल अनआमः155].

एवं अल्लाह तआला ने फरमायाः {ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की तरफ से दलील आ चुकी है और हम ने तुम्हारी तरफ वाज़ेह और साफ नूर (पाक कु़रआन) उतार दिया है“।
[अल निसाः174].

और अल्लाह तआला ने अंतिम नबी व रसूल और इंसानों में सब से सर्वश्रेष्ठ मुहम्मद और उन की रिसालत पर ईमान को कलमये शहादत (أَشْهَدُ أَن لَّا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللهِ ) में सर्वशक्तिमान अल्लाह पर ईमान लाने के संग जोड़ दिया है,अल्लाह तआला ने आप को दयालू

बना कर भेजा,आप ने लोगों को अंधेरों से रोशनी,जेहालत से ज्ञान और गुमराही से हिदायत की ओर बुलाया,आप ने न्यास (अमानत) को पहुँचाया,उम्मत की शुभचिन्ता की और आप को अपनी उम्मत की अधिक चिन्ता रहती थी,

अल्लाह तआला ने फरमायाः {तुम्हारे पास एक ऐसे पैग़म्बर आये हैं जो तुम्हारी ही जाति से हैं जिन को तुम्हारे नुक़्सान की बातेें बहुत भारी लगती हैं,जो तुम्हारे फायदे के बड़े इच्छुक रहते हैं,ईमान वालों के लिये बहुत ही शफीक़ दयालू हैं“।}[अत्तौबाः128].

और अल्लाह तआला ने अपने नबी और रसूल को उन के योग्य अनुसार अधिकार दिये आप इंसानों में सब से सर्वश्रेष्ठ और उन के सरदार थे,आप ने फरमायाः «मैं आदम की अवलाद का सरदार हूँ और इस में कोई गर्व की बात नहीं» (इब्ने माजा)

और नबी के अधिकार (हुकू़क) में सेः

1- इस बात पर ईमान लाना है कि आप अल्लाह के बंदे और उस के रसूल हैं और अल्लाह तआला ने आप को संसार वालों के लिये दया (रह्मत) बना कर भेजा है आप ने न्यास (अमानत) को पहुँचाया, ईशदौत्य की तब्लीग़ की अल्लाह तआला ने फरमायाः {तो तुम अल्लाह पर और उस के रसूल पर और उस ज्योति (नूर) पर जिसे हम ने उतारा है ईमान लाओ“।}[अत्तग़ाबूनः8].

और नबी ने फरमायाः «उस ज़ात की क़सम जिस के हाथ में मुहम्मद की जान है,मेरे विषय में कोई भी इस उम्मत का आदमी चाहे वह यहूदी हो या ईसाई सुने फिर वह मर जाये और मेरी लायी हुई चीज़ पर ईमान न लाये तो वह नरक में जायेगा।» (मुस्लिम).

2- जो चीज़ें आप को अल्लाह की ओर से मिली हैं उस का अनुसमर्थन(तस्दीक़) और क़बूल करना और इस बात का विश्वास रखना कि यही सत्य है निःसंदेह आप ने इसे अल्लाह तआला की ओर से पहुँचाया है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {ईमान वाले तो वे हैं जो अल्लाह पर और उस के रसूल पर ईमान लायें फिर शंका- संदेह न करें“।}[अलहुज्रातः15].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {तो क़सम है तेरे रब की यह ईमान वाले नहीं हो सकते जब तक के सभी आपस के इख्तिलाफ में आप को फैसला करने वाला न कु़बूल करलें,फिर जो फैसला आप करदें उन से अपने दिलों में ज़रा भी तंगी और नाखुशी न पायें और फरमाँबरदार की तरह कु़बूल करलें“।}[अन्निसाः65].

3- नबी से प्रेम करना,अल्लाह तआला ने फरमायाः {कह दीजिये कि अगर तुम्हारे बाप तुम्हारे बेटे और तुम्हारे भाई और तुम्हारी बीवियाँ और तुम्हारे वंश और कमाया हुवा धन और यह तिजारत जिस की कमी से तुम डरते हो,और वे घर जिन्हें तुम प्यारा रखते हो (अगर) यह तुम्हें अल्लाह और उस के रसूल और अल्लाह की राह में जिहाद से अधिक प्यारे हैं तो तुम इन्तेज़ार करो कि अल्लाह तआला अपना अज़ाब ले आये,अल्लाह तआला फासिक़ो को रास्ता नहीं दिखाता है“।}[अत्तोबाः24].

और नबी ने फरमायाः «तुम में का कोई व्यक्ति उस वक़्त तक मोमिन नहीं हो सकता जब तक कि मैं उस के निकट उस के पिता उस की संतान,और संपूर्ण लोगों से अधिक प्रिय न हो जाऊँ।» (बुखारी).

4- आप की आदर व सम्मान एवं प्रतिष्ठा करना,अल्लाह तआला ने फरमायाः {ताकि तुम अल्लाह और उस के रसूल पर ईमान लाओ और उस की सहायता एवं सम्मान करो“।}[अल फत्हः9].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {जो लोग इस नबी पर ईमान लाये और उन की ताईद की,उन की सहायता की,और उस नूर की इŸोबा की जो उन के साथ भेजा गया है,ऐसे लोग पूरी कामयाबी हासिल करने वाले हैं“।}[अल आराफः157].

5- नबी के वह घर वाले जो इस्लाम लाये,आप की सुन्नत को अपनाया उन से प्रेम करना, उन से लगाव रखना और उन की इज़्ज़त करना, और हमारे नबी मुहम्मद की वसिय्यत को समझना,जब कि आप ने फरमायाः «मैं अपने घर वालों के बारे में तुम्हें अल्लाह का खौफ याद दिलाता हूँ, मैं अपने घर वालों के बारे में तुम्हें अल्लाह का खौफ याद दिलाता हूँ, मैं अपने घर वालों के बारे में तुम्हें अल्लाह का खौफ याद दिलाता हूँ» (मुस्लिम)

और आले बैते रसूल अर्थात नबी के घर वाले लोगों में सब से श्रेष्ठ हैं जैसे आप की बीवियाँ,आप की अवलाद और आप के वह रिश्तेदार जिन पर सदक़ा का माल हराम है,इन की तौहीन करना,इन्हें बुरा भला कहना जायज़ नहीं है जैसा कि उन्हें गुनाहों से मासूम समझना या अल्लाह को छोड़ कर उन को पुकारना नाजायज़ है।

6- आप के वह सहाबा जो आप पर ईमान लाये और आप की तस्दीक़ की उन से प्रेम करना,और उन के अन्दर कमी न ढूँडना क्योंकि अल्लाह तआला ने उन की तारीफ की है।

7- आप के वह सहाबा जिन्हांे ने आप की तस्दीक़ की,आप पर ईमान लाये उन के जीवन चरिन्न में बुराई न ढूँडना क्योंकि यह उन लोगों में से हैं जिन की अल्लाह तआला ने तारीफ की है,फरमायाः {मोहम्मद अल्लाह के रसूल हैं और जो लोग उन के साथ हैं काफिरों पर कठोर हैं आपस में रहम दिल हैं तू उन्हें देखेगा कि रूकू और सज्दे कर रहे हैं,अल्लाह की कृपा और खुशी की कामना में हैं,उन का निशान उन के मुँह पर सज्दों के असर से है।}[अल फत्हः29].

और नबी ने उन के बारे में कहाः «मेरे सहाबा को गाली मत दो, मेरे सहाबा को गाली मत दो,उस ज़ात की क़सम जिस के हाथ में मेरी जान है अगर तुम में से कोई उहुद पहाड़ के बराबर सोना भी अल्लाह की राह में खर्च करे तो भी वह उन के मुद (सेर भर, एक मापने का पैमाना) या आधे सेर के बराबर नहीं पहुँच सकता» (मुस्लिम)

और सहाबा में सब से श्रेष्ठ खुलफाये राशदीनः अर्थात अबूकर फिर उमर फिर उसमान और अली हैं अल्लाह तआला उन से और संपूर्ण सहाबा से प्रसन्न हो,अल्लाह तआला ने फरमायाः

{और जो मुहाजिर(मक्का से मदीना आये हुये लोग) और अंसार (मदीना के मूल निवासी) पहले हैं अर्थात पहले ईमान लाये हैं और जितने लोग बिना किसी गर्ज़ से उन के पैरोकार हैं अल्लाह उन सभी से खुश हुआ और वे सब अल्लाह से खुश हुये और (अल्लाह ने) उन के लिये ऐसे बाग़ का इन्तेज़ाम कर रखा है जिन के नीचे नहरें बहती हैं,जिन में वे हमेशा रहेंगे,यह बड़ी कामयाबी है“।}[अत्तोबाः100].

इन सभों ने नबी की ओर से तब्लीग़ की यहाँ तक कि दीन और ज्ञान हम तक पहँुचा।



अल्लाह से मुलाक़ात पर ईमान

 अल्लाह से मुलाक़ात पर ईमान
 
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अल्लाह से मुलाक़ात पर ईमान

संपूर्ण सृष्टि को अल्लाह की ओर लौटना है और वही उन के लौटन की जगह और उन का अंजाम है, और यह अल्लाह पर ईमान लाने का महत्वपूर्ण रुक्न है, बल्कि यह ईमान के अर्कान में से है,और ईमान के अर्कान में से प्रलोक पर ईमान लाना है,यह बात प्रमाणित है कि जब हमारे नबी (मुहम्मद) से जिब्रील अमीन ने आप के सहाबा के सामने उन्हें अर्काने ईमान सिखाने की निय्यत से पूछा तो आप ने उन से फरमायाः «तुम अल्लाह पर ईमान लाओ और उस के फरिश्तों पर ईमान लाओ और उस की किताबों पर और उस के रसूलों पर और प्रलोक पर और तक़्दीर की अच्छाई और उस की बुराई पर ईमान लाओ।» (मुस्लिम)-

और इसे अल योमिल आखिर (अंतिम दिन) इस लिये कहा जाता है क्यांेकि इस के बाद कोई दिन नहीं होगा वह इस प्रकार कि जन्नती जन्नत में और जहन्नमी जहन्नम में चले जायेंगे,और कु़रआन में इस दिन के अनेक नाम बताये गये हैं जो इस दिन की स्थिति उस की महानता और उस में पेश आने वाले घटनाओं पर प्रमाण (दलालत करते) हैं,जैसे योमुल वाक़ेआ(वाक़े होने वाली) क्यांेकि इस का आना यक़ीनी है,और इसे अल खाफिज़ा (पस्त करने वाली) और अर्राफेआ (उठाने वाली) कहा जाता है क्योंकि उस दिन एक क़ौम के दरजे को ऊँचा करके उन्हंे जन्नत में रखा जायेगा और दूसरी क़ौम के दरजे को कम करके उन्हें जहन्नम में डाला जायेगा,और इस दिन को हिसाब और अदले बदले का दिन भी कहा गया है और इसे अलहाक्क़ा (सिद्व होने वाली) भी कहा गया है क्योंकि उस दिन अल्लाह तआला की खबरेें सत्य साबित होंगी और इसे अत्तामा कहा गया है जिस का अर्थ ग़ालिब होने के हैं क्योंकि यह दिन सब पर ग़ालिब होगा और इस दिन को अस्साख़्ख़ा (कान बहरे करने वाली) भी कहा गया है क्यांेकि सूर फूँकने के कारण लोग बहरे हो जायेंगे, और इसे योमुल वईद (वादे का दिन) कहा गया है क्योंकि उस दिन काफिरों से किया हुआ अल्लाह के अज़ाब का वादा पूरा होगा,और इस दिन को योमुल हस्रह (अफ्सोस व शर्मिन्दगी का दिन) भी कहा गया है क्यांेकि इस दिन लोग हस्रत और अफ्सोस करेंगे,और इस दिन को योमुत्तलाक़ (मिलने का दिन) कहा गया है,क्योंकि सब एक जगह पर मिलेेंगे,और इस दिन को योमुल आजि़फा (क़रीब आने वाली) भी कहा गया है क्यांेकि यह अधिक क़रीब है और इस दिन को योमुत्तनाद (हाँक पुकार का दिन ) भी कहा गया है क्योंकि उस दिन एक दूसरे को पुकारेंगे, जन्नती जहन्नमियों को और जहन्नमी जन्नतियों को पुकारेंगे, और उस दिन को योमुन अक़ीम (बाँझ दिन) भी कहा गया है, क्योंकि वह अंतिम दिन होगा उस के बाद कोई दिन नहीं आयेगा,और इस दिन को अद्दारुल आखिरा(आखिरत का घर) भी कहा गया है,और इस दिन को दारुल क़रार (मुस्तकि़ल घर) भी कहा गया है, और इस दिन को अलग़ाशिया (ढाँप लेने वाली) भी कहा गया है क्योंकि यह लोगों को ढाँप लेगी... इस के अतिरिक्त भी अनेक नाम हैं।

प्रलोक पर ईमान निम्न लिखित प्रकार हैंः

पहली बातः मरने के बाद पेश आने वाली चीज़ों पर ईमान लानाजैसे क़ब्र की परिक्षा (आज़माइश)ः

इस का अर्थ मुरदे से उस के रब,उस के दीन और उस के नबी के विषय में प्रश्न है, ईमान वालों को अल्लाह (तआला) पक्की बात के साथ क़ायम रखता है,तो वह कहता हैः मेरा रब अल्लाह है और मेरा दीन इस्लाम है और मेरे नबी मुहम्मद हैं,और अल्लाह तआला ज़ालिमों को भटका देता है,काफिर कहेगा (हाय ...हाय मैं नहीं जानता) और कपटाचारी या शक करने वाला कहेगाः (मैं नहीं जानता मैं ने लोगों को यह कहते हुये सुना तो मैं ने भी वैसा कह दिया).

क़ब्र का अज़ाब और उस की नेमतेंः

क़ब्र का अज़ाब ज़ालिमों,कपटाचारियों और काफिरों और कुछ गुनहगार मुसलमानों के लिये है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {अगर आप ज़ालिमों को मौत के सख्त अज़ाब में देखेंगे जब कि फरिश्ते अपने हाथ लपकाये होते हैं, कि अपनी जान निकालो,आज तुम्हें अल्लाह पर नाहक़ इल्ज़ाम लगाने और घमंड से उस की आयतों का इन्कार करने के कारण अपमानकारी(रुस्वाकुन) बदला दिया जायेगा“।}[अल अन्आमः93].

{अल अन्आमः93}. {आग है जिस के सामने यह हर सुबह और शाम को लाये जाते हैं और जिस दिन क़यामत आयेगी(हुक्म होगा कि) फिरऔन के पैरोकारों को अधिक सख्त अज़ाब में डालो।}[ग़ाफिरः46].

और जै़द बिन साबित की हदीस में है जिसे वे नबी से रिवायत करते हैं,आप ने फरमायाः «अगर मुझे डर न होता कि तुम दफन करना छोड़ दोगे तो ज़रूर मैं अल्लाह से दुआ करता कि वह तुम्हें क़ब्र का अज़ाब सुनाये जो मैं सुनता हूँ,फिर आप हमारी ओर मुतवज्जेह हुये,फरमायाः क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगो,तो हम सब ने कहाः हम क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगते हैं,फिर आप ने कहाः क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगो, तो हम सब ने कहाः हम क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगते हैं,फिर आप ने कहाः तुम ज़ाहिरी और बातिनी (पोशीदा) फित्नों से अल्लाह तआला की पनाह माँगो,हम सब ने कहा हम ज़ाहिरी व बातिनी फित्नों से अल्लाह की पनाह माँगते हैं,फिर आप ने फरमायाः तुम दज्जाल के फित्ने से अल्लाह की पनाह माँगो।» (मुस्लिम).

उसमान जब किसी क़ब्र के पास खड़े होते तो इस क़दर रोते कि आप की दाढ़ी भीग जाती,कहा गया कि जन्नत और जहन्नम के बारे में बयान किया जाता है तो आप नहीं रोते हैं और इस से अर्थात क़ब्र देख कर रो रहे हैं? यह सुन कर आप ने कहाः निःसंदेह अल्लाह के संदेष्टा ने फरमायाः बेशक आखिरत की मन्जि़लों मंे क़ब्र पहली मन्जि़ल है अगर आदमी इस से बच गया तो उस के बाद का मामला इस से सरल है और यदि इस से न बच सका तो इस के बाद का मामला इस से अधिक कष्ट है उसमान कहते हैं रसूलुल्लाह फरमाते हैंः मैं नेे क़ब्र से अधिक भयानक दृश्य (मन्ज़र) नहीं देखा। (अहमद).

और रही बात क़ब्र की नेमतों की तो यह सच्चे मोमिनों के लिये है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {हक़ीक़त में जिन लोगों ने कहा कि हमारा रब अल्लाह है फिर उसी पर जमे रहे,उन के पास फरिश्ते आते हैं कि तुम कुछ भी भयभीत और दुखी न हो बल्कि उस जन्नत की खुशखबरी सुन लो जिस का तुम से वादा किया गया है“।}[फुस्सिलतः30].

और अल्लाह तआला ने कहाः {तो जब कि (जान) गले तक पहुँ जाये और तुम उस समय देखते रहो, और हम उस इंसान से तुम्हारे मुक़ाबले अधिक क़रीब होते हैं,लेकिन तुम नहीं देख सकते,तो अगर तुम किसी की आज्ञा (इताअत) के अधीन नहीं और उस कथन में सच्चे हो तो तनिक उस प्राण को तो लौटाओ,तो जो कोई भी क़रीब होगा उसे तो सुख है और खाना है और सुखदायी जन्नत है,और जो इंसान दाहिने हाथ वालों में से है तो सलाम है तेरे लिये कि तू दाहिने वालों में से है,लेकिन अगर कोई झुटलाने वाले पथ भ्रष्टों में से है तो खौलते हुये पानी से मेहमानी है और नरक में जाना है,यह सरासर हक़ और बिल्कुल निश्चित है,तो तू अपने रब के नाम की पविन्नता बयान कर“।}[अल वाक़ेआः83-96].

और नबी ने उस मोमिन के विषय में जो अपनी क़ब्र में दो फरिश्तों के प्रश्नों का उत्तर देदेगा फरमायाः «आकाश से एक पुकार लगाने वाला पुकार लगायेगा कि मेरे बंदे ने सच कहा,इस के लिये जन्नत का बिस्तर लगा दो और इसे जन्नत के कपड़े पहनाओ और इस के लिये जन्नत का द्वार खोल दो,कहते हैं कि फिर उस के पास जन्नत की हवा और उस की खुशबू आयेगी और जहाँ तक उस की निगाह जायेगी उस की क़ब्र को कुशादा कर दिया जायेगा।» इस हदीस को इमाम अहमद और अबूदावूद ने एक लम्बी हदीस में रिवायत की है।

दूसरी बातः मरने के बाद जी उठने पर ईमान

अर्थात जब दोबारा सूर में फूँका जायेगा तो लोग संपूर्ण संसार के रब के सामने खड़े होजायेंगे,वे नंगे पैर,नंगे बदन और बिना खतना किये हुये उठेंगे,अल्लाह तआला ने फरमायाः ”जैसे हम ने पहली बार पैदा किया था उसी प्रकार दोबारा करेंगे,यह हमारा मज़बूत वादा है और यह हम अवश्य करके ही रहेंगे“। [अल अंबियाः104].

और मरने के बाद दोबारा उठाया जाना हक़ और प्रमाणित है,जिस पर कु़रआन, हदीस और मुसलमानों का इज्मा (सम्मति) है.अल्लाह तआला ने फरमायाः और मरने के बाद दोबारा उठाया जाना हक़ और प्रमाणित है,जिस पर कु़रआन, हदीस और मुसलमानों का इज्मा (सम्मति) है.अल्लाह तआला ने फरमायाः[अल मोमिनूनः15-16].

और नबी ने फरमायाः «क़यामत के दिन लोगों को नंगे पैर और बिना खतना किये हुये उठाया जायेगा।» (बुखारी,मुस्लिम),

और इस के सबूत पर मुसलमानों का इज्मा है,और हिक्मत का तक़ाज़ा भी यही है, वह इस प्रकार कि अल्लाह तआला अपनी सृष्टि को दोबारा पैदा करे ताकि उन्हें उन कार्यों का बदला दे जिन कार्यों के करने का अपने रसूल की जु़बानी मुकल्लफ किया था,अल्लाह तआला ने फरमायाः {क्या तुम यह समझ बैठे हो कि हम ने तुम्हें बेकार ही पैदा किया है,और यह कि तुम हमारी ओर लौटाये ही नहीं जाओगे“?}
[अल मोमिनूनः115].

और अल्लाह तआला ने अपने नबी से फरमायाः {जिस (अल्लाह) ने आप पर कुऱ्आन उतारा है वह आप को दोबारा पहली जगह पर लाने वाला है“।}[अल क़ससः85].

तीसरी बातः क़यामत और क़यामत की निशानियों के विषय में जो आया है उस पर ईमान लानाः

यह निशानियाँ क़यामत से पहले ज़ाहिर हूँगी और क़यामत के क़रीब होने का प्रमाण होंगी,और निशानियों को दो हिस्से छोटी और बड़ी निशानियों में बाँटा गया है.

छोटी निशानियाँः

इस से मुराद वह निशानियाँ हैं जो आम तौर पर क़यामत से अधिक पहले ज़ाहिर हूँगी,और उन में से कुछ निशानियाँ ऐसी हैं जो ज़ाहिर होकर समाप्त हो गई हैं,और ये दोबारा भी ज़ाहिर हो सकती हैं,और उन में से कुछ ऐसी हैं जो ज़ाहिर हो रही हैं और अभी भी बार बार ज़ाहिर हो रही हैं और उन में से कुछ ऐसी हैं जो अभी तक ज़ाहिर नहीं हुयी हैं लेकिन यह ज़ाहिर होंगी जैसा कि हमारे सच्चे नबी ने इस की खबर दी है,उदाहरण के तौर परः मुहम्मद का नबी बनाया जाना,आप की मौत,और बैतुल मक्दिस का फतह होना,फित्नों का ज़ाहिर होना,अमानतदारी का खतम हो जाना,ज्ञान का उठ जाना,जहालत का आम होना, जि़ना (व्यभिचार),सूद,गाना बजाना और शराब नोशी का बढ़ जाना और बकरियाँ चराने वालों का बड़ी बड़ी बिल्डिगें खड़ी करना,अवलाद का अपनी माँओं की नाफरमानी करना यहाँ तक कि अपनी माँओं से दासियों जैसा मामला करना,क़त्ल का बढ़ जाना,भूकंप का अधिक आना,धरती का धंस जाना,मस्ख(विकृत)और दोषारोपण का जाहिर होना बारीक कपड़ों का पहनना(जिस से बदन जाहिर हो),अधिकतर झूटी गवाही देना,सत्य गवाही का छुपाना आदि उन चीज़ों का आम हो जाना जिन का बयान कऱ्ुआन और हदीस में आया है.

बड़ी निशानियाँः

और यह महान बातें हैं जिन का ज़ाहिर होना इस बात की दलील होगी कि क़यामत क़रीब है और इस महान दिन के आने में बहुत कम समय रह गया है,और यह दस निशानियाँ हैंः दज्जाल का आना,ईसा बिन मरयम का उतरना,याजूज माजूज का ज़ाहिर होना,और तीन खस्फ (ज़मीन का धंसना) होगा एक खस्फ पूरब में और एक पश्चिम में और एक खस्फ अरब के जज़ीरे में,और धुआँ का उठना,और सूरज का पश्चिम से निकलना,एक जानवर का निकलना, और उस आग का ज़ाहिर होना जो लोगों को एकन्न होने के स्थान पर हाँक कर ले जायेगी,और निशानियाँ एक के बाद एक प्रकट होंगी,जब इन निशानियों में से पहली निशानी ज़ाहिर हो जायेगी तो दूसरी उस के बाद ही ज़ाहिर हो जायेगी.

चैथी बातः क़यामत की हौलनाकी और उस की घटनाओं के विषय में बताई गई बातों पर ईमान जैसेः

1- बड़े बड़े पहाड़ों को कूट कर मिट्टी बना दिया जायेगा और उसे ज़मीन के बराबर कर दिया जायेगा,अल्लाह तआला ने फरमायाः {और आप पहाड़ों को अपनी जगह पर जमा हुआ समझते हैं लेकिन वे भी बादल की तरह उड़ते फिरेंगे“।}[अन्नमलः88].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और पहाण बिल्कुल कण-कण कर दिये जायेंगे,फिर वह बिखरी धूल समान हो जायेंगे“।}[अल वाके़आः5-6].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और पहाड़ रंगीन ऊन की तरह हो जायेंगे“।}
[अल मआरिजः9].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {वे आप से पहाड़ों के बारे में सवाल करते है तो कह दें उन्हें मेरा रब कण-कण करके उड़ा देगा,और (धरती) को समतल चटियल मैदान करके छोड़ेगा,जिस में न तो कहीं मोड़ देखेगा न ऊँच नीच“।}[ताहाः105-107].

2- समुद्रों का फट पड़ना और उस का भड़काया जाना,यह समुद्र हमारी धरती के अधिकतर हिस्से को घेरे हुये हैं उस दिन बह चलेंगे,अल्लाह तआला ने फरमायाः {और जब समुद्र बह चलेंगे“।}[अल इन्फितारः 3].

{और जब समुद्र भड़काये जायेंगे“।}[अत्तक्वीरः 6].

3- वह धरती जिस से लोग परिचत हैं बदल दिया जायेगा,इसी प्रकार आकाशों को भी बदल दिया जायेगा,इन्हें ऐसी धरती पर उठाया जायेगा जिस का न तो इन्हें ज्ञान होगा और न प्रभाव, अल्लाह तआला ने फरमायाः {जिस दिन धरती इस धरती के इलावा दूसरी बदल दी जायेगी और आकाशों को भी और सभी के सभी एक अल्लाह ज़बरदस्त के सामने होंगे“।}[इब्राहीमः 48].

नबी ने फरमायाः «क़यामत के दिन उजले गेहूँ की रोटी जैसी साफ और सुर्खी मायल उजली धरती पर लोगों का हश्र होगा,जिस में किसी प्रकार का कोई निशान नहीं होगा» (बुखारी,मुस्लिम)

धरती सफेद हो जायेगी अर्थात उस पर कोई चिन्ह और निशान नहीं होगा।

4ः वहाँ पर नई नई चीज़ें देखेंगे,वे सूरज और चाँद को एक साथ देखंेगे जिस से उन की परेशानी और डर बढ़ जायेगा,अल्लाह तआला ने फरमायाः {तो जिस समय आँखें पथरा जायेंगी और चाँद प्रकाशहीन(बेनूर) हो जायेगा और सूरज और चाँद इकðा कर दिये जायेंगे,उस दिन इंसान कहेगा कि आज भागने की जगह कहाँ है“?}[अल कि़यामहः 7-10].

5- जिस दिन सूर फूँका जायेगा वह दुनियावी जि़न्दगी का अंतिम दिन होगा,और जब वह दिन आयेगा तो सूर में फूँक दिया जायेगा,फिर यह फूँक आसमान और जमीन के बीच में रहने वालों के जीवन को समाप्त करदेगी। {और सूर फूँक दिया जायेगा तो आकाशों और धरती वाले सभी बेहोश होकर गिर पड़ेंगे लेकिन जिसे अल्लाह चाहे“।}[अज़्ज़ुमरः 68].

और यह एक ख़तरनाक और विनाशकारी फूँक होगी जिसे सुनने के बाद कोई व्यक्ति किसी चीज़ का आदेश देने की सकत नहीं रख सकेगस और न ही अपने घर वालों और न ही दोस्तों के पास लौट सकेगा। {उन्हें केवल एक ज़ोरदार चीख का इंतेज़ार है जो उन्हें आ पकड़ेगी,और ये आपसी लड़ाई झगड़े में ही होंगे,उस समय ये न तो वसीयत कर सकेंगे और न अपने परिवार की ओर लौट सकेंगे“।}[यासीनः 49-50].

और नबी ने फरमायाः «फिर सूर में फूँक दिया जायेगा जो भी इसे सुनेगा वह एक तरफ से अपनी गरदन झुका देगा और दूसरी तरफ से उठा लेगा अर्थात अचेत होकर गिर पडे़ेगा,फरमायाः सब से पहले सूर की आवाज़ सुनने वाला वह व्यक्ति होगा जो अपने ऊंट के हौज़ पर कलावा कर रहा होगा,फिर वह अचेत हो जायेगा और दूसरे लोग भी अचेत हो जायेंगे» (मुस्लिम)

6- महशर की ज़मीन पर सब के सब इकðा होंगे चाहे वे पहले पैदा हुये हों या सब से बाद में अर्थात उस धरती पर अव्लो आखिर,जिन्नात,इंसान,बल्कि उन के जानवर भी इकðा होंगे, अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक इस में उन लोगों के लिये नसीहत है जो क़यामत के अज़ाब से डरते हैं,वह दिन जिस में सब लोग जमा किये जायेंगे और ये वो दिन है जिस में सब हाजि़र किये जायेंगे।}[हूदः 103].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {कह दीजिये कि बेशक सब अगले और पिछले ज़रूर जमा किये जायेंगे,एक निर्धाति दिन के समय“।}[अल वाक़ेआः 49-50].

7- लोग उसी प्रकार नंगे उठाये जायेंगे जैसा कि अल्लाह तआला ने उन्हें नंगे पैदा किया था,और इस भयानक स्थिति की गंभीरता को देखते हुये वे इस की ओर मुतवज्जेह ही नहीं होंगे,और माई आयशा रजि़अल्लाहु अन्हा ने भी इस पर आश्चर्य ज़ाहिर किया था जैसा कि आयशा रजि़अल्लाहु अन्हा से रिवायत है,कहती हैंः «रसूलुल्लाह ने फरमायाः लोग नंगे पैर नंगे जिस्म और बिना खतना किये हुये उठाये जायेंगे,आयशा कहती हैं कि मैं ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मर्द औरत सब नंगे उठाये जायेंगे ऐसी सूरत में तो एक दूसरे को देखेंगे,आप ने फरमायाः वह इस विषय में सोचें इस से कहीं भयानक स्तिथि होगी» (बुखारी)

8ः मज़्लूम को ज़ालिम से बदला दिलाया जायेगा,यहाँ तक कि चैपायों को भी (बदला दिलाया जायेगा) नबी ने फरमायाः «अल्लाह तआला ने फरमायाः «तुम ज़रूर क़यामत के दिन हक़ वालों के हुकू़क लौटाओगे,यहाँ तक कि बिना सींग वाली को सींग वाली बकरी से बदला दिलाया जायेगा» (मुस्लिम),

और नबी ने फरमायाः «जिस व्यक्ति ने अपने किसी भाई पर उस की इज़्ज़त व आबरू या किसी और चीज़ में ज़ुल्म किया हो तो वह आज ही उस को माफ करवाले,इस से पहले कि वह दिन आ जाये जिस दिन न दीनार होगा न दिरहम,अगर उस के पास नेकी होगी तो उस के ज़ुल्म के बराबर ये नेकी उस से ले ली जायेगी,और अगर उस के पास नेकी नहीं होगी तो उस के साथी अर्थात मज़्लूम की बराइयाँ लेकर उस पर लाद दी जायेंगी» (बुखारी)

9- सूरज का लोगों के अधिक निकट होना यहाँ तक कि लोग अपने आमाल अनुसार पसीने में डूबे हुये होंगे,नबी ने फरमायाः «क़यामत के दिन सूरज लोगों के अधिक निकट होगा यहाँ तक कि कुछ लोगों से एक मील के फासिले पर ही होगा,सुलैम बिन आमिर कहते हैंः अल्लाह की क़सम मुझे पता नहीं कि अल्लाह के रसूल ने मील से क्या मुराद लिया है,मील से मुराद एक मील की दूरी है या उस से सुरमे की सलाई मुराद है,आप ने फरमायाः लोग अपने आमाल के हिसाब से पसीने में डूबे हुये होंगे,कोई अपने टखनों तक तो काई अपने घुटनों तक डूबा होगा,और कोई अपनी कमर तक और किसी को पसीने की लगाम लगाई जायेगी अर्थात वह मुंह तक पसीने में डूबा होगा,रावी कहते हैं कि रसूलुल्लाह ने अपने हाथ से अपने मुँह की ओर इशारा किया» (मुस्लिम)

10- कुछ लोग अपने नामये आमाल दायें हाथ में लिये हुये होंगे तो कुछ लोग बायंे हाथ में और लोग आश्चर्य,डर और भयभीत होंगे यहाँ तक कि हर व्यक्ति का नामये आमाल उस के हाथ में आ जायेगा,जब नामये आमाल उन के दायें हाथ में दिया जायेगा तो इस से मोमिन खुश होंगे, उन्हें समझ आजायेगा कि मुक्ति उन के निकट है,जब के काफिरों और मुनाफिक़ों के दुख बढ़ जायेंगे जब उन के नामये आमाल उन के बाँये हाथ में आ जायेगें, यह पूरा पूरा बदला होगा,अल्लाह तआला ने फरमायाः {तो जिस का कर्मपन्न(आमाल नामा) उस के दाहिने हाथ में दिया जायेगा तो वह कहने लगेगा कि लो मेरा कर्मपन्न पढ़ लो,मुझे तो पूरा विश्वास था कि मैं अपना हिसाब पानेवाला हूँ, तो वह एक सुखद जीवन में होगा,ऊँचे जन्नत में,जिस के फल झुके पड़े होंगे,(उन से कहा जायेगा कि) मज़े से खाओ पियो,अपने उन कर्माें के बदले जो तुम ने पिछल ज़माने में किये,लेकिन जिसे उस का कर्मपन्न बाँये हाथ में दिया जायेगा,वह तो कहेगा कि हाय मुझे मेरा कर्मपन्न दिया ही न जाता,और मैं जानता ही नहीं कि हिसाब क्या है? काश!मौत (मेरा) काम ही खत्म कर देती,मेरे धन ने भी मुझे कोई लाभ न दिया,मेरा राज्य भी मुझ से जाता रहा“।}[अलहाक़्काः 19-29].

11- अल्लाह तआला ने फरमायाः अधिक डर और भय के कारण आदमी किसी के विषय में कोई प्रश्न नहीं करेगा उसे केवल अपनी जान के लाले पड़े होंगे,अल्लाह तआला ने फरमायाः {उस दिन न माल काम आयेगा और न ही बेटे“।}[अश्शोराः 88].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {तो आदमी उस दिन भागेगा अपने भाई से,अपनी माँ और अपने बाप से,अपनी पत्नी और संतान से,उन में से हर एक को उस दिन एक ऐसी फिक्र होगी जो उसे(मशगूल रखने को) काफी होगी“।}
[अबसः 34-37].

पाँचवीं बातः हिसाब और बदले पर ईमानः

आदमी के कर्मों का हिसाब होगा और उस का बदला दिया जायेगा, अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक हमारी ओर उन को लौटना है,फिर बेशक उन से हिसाब लेना है“।}
[अलग़ाशियाः 25-26].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {जो इंसान अच्छा काम करेगा उसे उस के दस गुना मिलेंगे,और जो बुरे काम करेगा उसे उस के बराबर सज़ा मिलेगी और उन लोगों पर जु़ल्म न होगा“।}[अलअन्आमः 160].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और हम क़यामत के दिन उन के बीच ठीक-ठीक तौल की तराजू़ ला रखेंगे,फिर किसी पर किसी प्रकार का जु़ल्म न किया जायेगा,और अगर एक सरसों के दाने के बराबर भी (अमल) होगा उसे हम सामने लायेंगे,और हम हिसाब करने के लिये काफी हंैं“।}[अलअंबियाः 47].और इब्ने उमर रजि़अल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि नबी ने फरमायाः «बेशक अल्लाह तआला मोमिन बंदे को अपने क़रीब करेगा,और उस पर अपना परदा डाल कर उसे छिपाता है,और कहता हैः क्या तुम इस इस गुनाह को जानते हो,वह कहेगा हाँ ऐ मेरे पालनहार यहाँ तक कि वह अपने सारे गुनाहों का इक़्रार कर लेगा और यह समझेगा कि वह हलाक होगया, तो अल्लाह तआला उस से कहेगा,मैं ने दुनिया में तेरे गुनाहों को छिपाया और आज मैं तेरे गुनाहों को क्षमा कर रहा हूँ,नबी ने फरमायाः फिर उसे उस की नेकियों की पंजिका दी जायेगी,रही बात काफिरों और कपटाचारियों की तो उन्हें सारी मखलूक़ के सामने बुलाया जायेगा।» {ये वह लोग हैं जिन्होंने अपने रब पर झूट बाँधा,सावधान अल्लाह की लानत है ज़ालिमों पर“।}[हूदः 18]. (बुखारी,मुस्लिम),

और नबी से हदीसे कु़दसी में साबित है अर्थात नबी अल्लाह तआला से रिवायत करते हैं कि अल्लाह तआला ने फरमायाः «अल्लाह तआला ने नेकियों और बुराइयों को लिख दिया है फिर उसे बयान किया है,जिस ने नेकी का इरादा किया परन्तु नेकी न कर सका तो अल्लाह तआला उस के लिये पूरी एक नेकी लिख देता है और अगर इरादा करने के बाद नेकी कर लेता है तो उस समय उस के लिये दस नेकियों से लेकर सात सौ गुना तक बल्कि उस से भी अधिकतर नेकियाँ लिख देता है और अगर बुराई का इरादा करके उसे न करे तो अल्लाह तआला उस के लिये पूरी एक नेकी लिखता है और अगर इरादा करके उस बुराई को कर लेता है तो अल्लाहत तआला उस के लिये केवल एक गुनाह लिखता है।» (बुखारी,मुस्लिम),

हसन बसरी से कहा गयाः हम ने देखा कि ताबईन इबादत में सहाबा से बढ़े हुये हंै तो सहाबा उन से किस चीज़ में आगे थे? हसन ने कहा यह लोग इबादत करते हैं इस हाल में कि दुनिया इन के दिलों में है जब कि सहाबा ने अल्लाह की इबादत की इस हाल में कि उन के दिलों में आखिरत थी।

और हिसाबो किताब और बदले के प्रमाण पर मुसलमानों का इज्मा है,और हिक्मत का तक़ाज़ा भी यही है क्योंकि अल्लाह तआला ने किताबंे उतारीं,रसूलों को भेजा और बंदों के लिये अपने ऊपर ईमान और अपनी इताअत को अनिवार्य किया और जो न उस की इताअत करे और न उस के रसूल की इताअत करे और न उस पर ईमान लाये उसे सख्त दर्दनाक अज़ाब की धमकी दी है,अगर हिसाबो किताब और बदले का मामला न होता तो यह बे मक़्सद होता जिस से अल्लाह तआला पाक है,और अल्लाह तआला ने अपने इस कथन से इस की ओर इशारा किया हैः {फिर हम उन से ज़रूर पूछ करेंगे जिन के पास पैग़ाम भेजा गया और पैग़म्बरों से ज़रूर पूछ करेंग,फिर हम उन के सामने इल्म के साथ बयान कर देंगे और हम बेखबर नहीं थे“।}[अल आराफः 6-7].

छटवीं बातः जन्नत और जहन्नम पर ईमानः

और यह सृष्टि का अंतिम हमेशगी वाला ठिकाना है,जन्नत तो यह नेमतों वाला घर है जिसे अल्लाह तआला ने उन परहेज़गार मोमिनों के लिये तय्यार किया है जो उन चीज़ो पर ईमान लाये जिन पर ईमान लाने को अल्लाह तआला ने ज़रूरी कर दिया है, और उन्हों ने अल्लाह और उस के रसूल की पैरवी की वह अल्लाह के लिये मुख्लिस हैं और उस के पैग़म्बर की इताअत करने वाले हैं.जन्नत में ऐसी नेमतें होंगी जिन्हें न तो किसी आँख ने देखी होंगीं और न ही किसी कान ने सुनी होंगी और न ही किसी इंसान के दिल में खयाल आया होगा,अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक जो लोग ईमान लाये और नेकी के काम किये,यह लोग बेहतरीन मखूलूक़ हैं,उन का बदला उन के रब के पास हमेशा रहने वाले स्वर्ग हैं जिन के नीचे नहरें बह रही हैं, जिन में वह हमेशा रहेंगे,अल्लाह उन से खुश हुआ और ये उस से,यह उस के लिये है जो अपने रब से डरे“।}[अल बय्यिनाः 7-8].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {कोई पराणी नहीं जानता जो कुछ हम नें उन की आँखों की ठंडक उन के लिये छिपा रखी है,जो कुछ करते थे यह उस का बदला है“।}[अस्सज्दाः 17].

और उन नेमतों में श्रेष्ठ नेमत स्वर्ग में अल्ल्लाह तआला का दीदार है,अल्लाह तआला ने फरमायाः{उस दिन बहुत से मुँह ताज़ा होंगे अपने रब की ओर देखते होंगे“।}[अल कि़यामाः 22-23].

अल्लाह तआला ने फरमायाः {जिन लोगों ने नेक काम किया है उन के लिये भलाई है,और कुछ ज़्यादा भी“।}[सूनुसः 26].

हुस्ना अर्थात स्वर्ग है और ज़्यादा अर्थात अल्लाह तआला का दीदार है,जैसा कि नबी ने फरमायाः «जब जन्नती जन्नत में प्रवेश कर जायेंगे कहा कि अल्लाह तआला कहेगाः तुम्हें किसी और चीज़ की इच्छा है? वह कहेंगे क्या तू ने हमारे चेहरों को रोशन नहीं किया,क्या तू ने हमें जन्नत में दाखिल नहीं किया और तू ने हमें जहन्नम से छुटकारा नहीं दिया?कहा कि फिर अल्लाह तआला परदा हटा देगा,तो लोगों को रब के दीदार से अधिक उत्तम चीज़ दी ही नहीं गई, फिर पैग़म्बर ने यह आयत पढ़ी»ः {जिन लोगों ने नेक काम किया है उन के लिये भलाई है,और कुछ ज़्यादा भी“।}[यूनुसः 26] (मुस्लिम).

और जहन्नम तो वह अज़ाब का घर है जिसे अल्लाह तआला ने उन ज़ालिम काफिरों के लिये तय्यार किया है जिन्हों ने अल्लाह का इन्कार किया और उस के पैग़म्बर की नाफरमानी की,उस में अज़ाब और ऐसे अनेक प्रकार के दुख दिये जायेंगे जिस के बारे में आदमी सोच भी नहीं सकता.अल्लाह तआला ने फरमायाः {और उस आग से डरो जो काफिरों के लिये तय्यार की गई है“।}[आले इमरानः 131].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक हम ने ज़ालिमों के लिये वह आग तय्यार कर रखी है जिस की परिधि (क़नातें) उन्हें घेर लेंगी,और अगर वह फरयाद करेंगें तो उन की मदद उस पानी से की जायेगी जो तलछट जैसा होगा वह चेहरे भून देगा,बड़ा ही बुरा पानी है और बड़ा बुरा आरामगाह (नरक) है“।}[अल कहफः 29].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {अल्लाह ने काफिरों पर धिक्कार भेजी है और उन के लिये भड़कती हुयी आग तय्यार कर रखी है,जिस में वे हमेशा रहेंगे,वे कोई पक्षधर(वली) और मदद करने वाला न पायेंगे,उस दिन उन के मुँह आग में उलटे पलटें जायेंगे कहंेगे कि काश हम अल्लाह(तआला) और रसूल के हुक्म की इताअत करते“।}[अल अहज़ाबः 64-66].

सब से हलका अज़ाब जिस व्यक्ति को दिया जायेगा -अल्लाह की पनाह-जिस के बारे में नबीने जि़क्र किया,आप ने फरमायाः «जहन्नमियों में से जिसे सब से हलका अज़ाब दिया जायेगा वह ऐसा व्यक्ति होगा जिस के दोनों पैरों के नीचे आग रख दी जायेगी जिस से उस का दिमाग उबाल खायेगा।» (बुखारी)

प्रलोक पर ईमान लाने के फलः

1- ईमान के एक रुक्न का वजूद,अल्लाह पर ईमान उस वक़्त तक साबित न होगा जब तक कि प्रलोक पर ईमान न हो,क्यांेकि यह ईमान का एक रुक्न है इस लिये अल्लाह तआला ने हमारे ऊपर गैर मोमिनों से जंग को अनिवार्य किया है, अल्लाह तआला ने फरमायाः {उन लोगांे से लड़ाई करो जो अल्लाह और प्रलोक पर ईमान नहीं रखते“।}[अत्तोबाः 29].

2- दुनिया और आखिरत में शान्ति और बड़े सवाब का वादा, अल्लाह तआला ने फरमायाः {याद रखो कि अल्लाह के मिन्नांे पर न कोई डर है न वे दुखी होते हैं“।}[यूनुसः 62].

3- बड़े पुण्य का वचन,अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक जो मुसलमान हो यहूदी हो,नसारा (ईसाई) हो या साबी हो,जो कोई भी अल्लाह तआला और क़यामत के दिन के दिन पर ईमान लायेगा और अच्छे काम करेगा उस का बदला उस के रब के पास है,और उन को न कोई डर है और न कोई ग़म होगा“।}[अल बक़राः 62].

4-भलाई के काम पर उभारना, अल्लाह तआला ने फरमायाः {ऐ ईमान वालो! अल्लाह के हुक्म की पैरवी करो और रसूल की और अपने में से हाकिमों के हुक्म को मानो,फिर अगर किसी बात में एख्तिलाफ करो तो उसे लौटाओ अल्लाह और उस के रसूल की ओर अगर तुम्हें अल्लाह और क़यामत के दिन पर ईमान है,यह सब से अच्छा है और नतीज़ा के एतबार से अधिक उत्तम है“।}[अन्निसाः 59].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {अल्लाह की मस्जिदों को तो वह आबाद करते हैं जो अल्लाह पर और आखिरत के दिन पर ईमान रखते हों“।}[अत्तोबाः 18].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {यक़ीनन तुम्हारे लिये रसूलुल्लाह में अच्छा नमूना है हर उस इन्सान के लिये जो अल्लाह और क़यामत के दिन की उम्मीद रखता है और अधिकतर अल्लाह को याद करता है“।}[अल अहज़ाबः 21].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {बेशक तुम्हारे लिये उन में अच्छे आदर्श (उसवा) हैं हर उस इन्सान के लिये जो अल्लाह और क़यामत के दिन की मुलाक़ात पर यक़ीन रखता हो“।}
[अल मुम्तहिनाः 6].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और अल्लाह की खुशी के लिये ठीक ठाक गवाही दो यही है वह जिस की शिक्षा (नसीहत) उन्हें दी जाती है जो अल्लाह पर और क़यामत के दिन पर ईमान रखते हांे“।}[अत्तलाक़ः 2].

मोमिनों की माँ आयशा रजि़अल्लाहु अन्हा ने एक महिला से कहाः मौत को अधिक याद करो इस से तुम्हारा दिल नरम होगा.

5- बुराइयांे से दूरी,अल्लाह तआला ने फरमायाः {उन के लिये जायज़ नहीं की अल्लाह ने उन के रिहम में जो पैदा किया हो उसे छिपायें अगर उन्हें अल्लाह (तआला) पर और क़यामत के दिन पर ईमान हो“।}[अल बक़राः 228].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और जब तुम अपनी औरतों का तलाक़ दो और वह अपनी इद्दत पूरी करलें तो उन्हें उन के पतियों से शादी करने से न रोको जब कि वह आपस में भलाई के एतबार से राज़ी हों,यह तालीम उन्हें दी जाती है जिन्हें तुम में से अल्लाह (तआला) पर और क़यामत के दिन पर यक़ीन और ईमान हो“।}[अल बक़राः 232].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {अल्लाह पर और क़यामत (प्रलय) के दिन पर ईमान और यक़ीन रखने वाले तो अपने माल से और जान से जिहाद करने से रुके रहने की कभी भी तुझ से इजाज़त नहीं माँगेंगे और अल्लाह तआला परहेज़गारों को अच्छी तरह जानता है,यह इजाज़त तो तुझ से वही माँगते हैं जिन्हें न अल्लाह पर ईमान है न आखिरत के दिन पर यक़ीन है जिन के दिल शक में पडे़ हुये हैं और यह अपने शक ही में भटक रहे हैं“।}[अत्तोबाः 44-45].

इसी लिये जो इस दिन पर ईमान नहीं लाता वह हराम में पड़ने से नहीं बचता है और न ही उस पर शर्म करता है {क्या तू ने (उसे भी) देखा जो बदले के दिन को झुटलाता है, यही वह है जो अनाथ (यतीम) को धक्के देता है,और ग़रीब को खाना खिलाने की पे्ररणा (तरग़ीब) नहीं देता“ ।}[अलमाऊनः1-3].

6-मोमिन चूँकि आखिरत की नेमतों और सवाब की उम्मीद रखता है इस लिये दुनिया की चीज़ों के न मिलने पर भी उसे तसल्ली रहती है,जन्नत का मिलना बड़ी कामयाबी है और दुनियावी जि़न्दगी केवल धोके का सामान है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {हर जानदार को मौत का मज़ा चखना ही है, और क़यामत के दिन तुम अपने बदले पूरे पूरे दिये जाओगे लेकिन जो इन्सान आग से हटा दिया जाये और जन्नत में दाखिल करा दिया जाये बेशक वह सफल हो गया और दुनिया की जि़न्दगी केवल धोके का सामान है“।}[आले इमरानः 185].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {आप कह दीजिये कि मैं अगर अपने रब का कहना न मानूँ तो मैं एक बडे़ दिन के अज़ाब से डराता हूँ,जिस से उस दिन सज़ा खत्म कर दी जायेगी उस पर अल्लाह ने बहुत रहमत की,और यह वाज़ेह कामयाबी है“।}[अल अनआमः 15-16].

और अल्लाह तआला ने फरमायाः {और प्रलोक (आखिरत) बहुत बेहतर और स्थाई (दायमी) है“।}[अल आलाः 17].

हसन रहिमहुल्लाह ने कहाः जिस ने मौत को पहचान लिया उस पर दुनिया की परेशानियाँ सरल हो जाती हैं दिल में सुधार नहीं हो सकता, और न वह कामयाब हो सकता है, और न ही उसे प्रसन्नता प्राप्त हो सकती है,और न ही आनंद,और न उसे अच्छा लग सकता है और न ही सुकून मिलता है, और न ही उसे शान्ति मिल सकती है मगर अपने रब की इबादत करके, उस से प्रेम करके, और उस की ओर लौट करके.

ौखुल इस्लाम इब्ने तैमियाश्



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