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अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषता जानने का महत्वः


अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषता जानने का महत्वः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषता जानने का महत्व निम्न लिखित बातों से ज़ाहिर होता हैः

पहली बातः

संपूर्ण ज्ञानों में अधिकतर प्रतिष्ठत वह ज्ञान है जिस का तअल्लुक़ अल्लाह की ज़ात और उस के नामों और उस की विशेषताओं से हो,और बंदे की जानकारी अनुसार

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के विषय में उस के भीतर अपने रब की बंदगी,उस से प्रेम,लगाव और उस की महानता उस का नसीब बन जाती है जो अल्लाह तआला की प्रसन्नता,उस के स्वर्ग की प्राप्ति और प्रलोक में अल्लाह के दीदार की निधि के हासिल होने का कारण होती है,और यह उद्देश्य अल्लाह की कृपा के बिना कदापि प्राप्ति नहीं हो सकता है।

दूसरी बातः

अल्लाह तआला के नामों और और उस की विशेषताओं का ज्ञान, मूल ज्ञान और ईमान की जड़ और पहला फर्ज़ है; क्यांेकि जब लोग अल्लाह तआला को अच्छे प्रकार से जान लेंगे तो वह सही ढंग से उस की इबादत भी करेंगे,अल्लाह तआला ने फरमायाः {तो जान लो कि अल्लाह के सिवा काई उपास्य नहीं“।}[मुहम्मदः 19].

तीसरी बातः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के ज्ञान से ईमान और विश्वास में बढ़ोतरी होती है,तौहीद प्रमाणित होती है और बंदगी का मज़ा मिलता है,और यही ईमान की रूह,उस की जड़ और उस का उद्देश्य है, और इस का सरल मार्ग कु़रआने करीम में मौजूद अल्लाह तआला के नामों और और उस की विशेषताओं में गौरो फिक्र करना है,अल्लाह तआला जब किसी बंदे को अपनी परिचय और उस के दिल में अपना प्रेम डालना चाहता है तो अपनी महान विशेषताओं को स्वीकार करने और वह्य के ताक़ से उसे प्राप्त करने के लिये उस के दिल को खोल देता है,फिर जब भी बंदे के सामने अल्लाह तआला की विशेषताओं में से कोई चीज़ आती है तो वह उसे क़बूल करता है,उस पर प्रसन्नता प्रकट करता है और स्वीकारता है और अधीनता के साथ उस पर विश्वास रखता है तो इस कारण उस का दिल रोशन हो जाता है।

किसी भी ज्ञान का महत्व उस ज्ञान से प्राप्ति होने वाली चीज़ों के महत्व पर आधारित होती है,और अल्लाह तआला,उस के नामों और उस की विशेषताओं के ज्ञान से बढ़ कर कोई ज्ञान नहीं ह

बंदे का सीना चैड़ा हो जाता है,प्रेम और प्रसन्नता से भर जाता है,फिर उस की खुशी बढ़ जाती है,उस की बेनियाज़ी अधिक हो जाती है,अल्लाह का परिचय मज़बूत हो जाता है,उस की रूह को संतुष्टि मिलती है और उस के दिल में शान्ति पैदा होती है,फिर वह उस ज्ञान के साथ उस के मैदानों में घूमता फिरता है,और ज्ञान के बगैचों में अपनी ज्ञानचक्षु (बसीरत) वाली आंख से देखता है,क्योंकि उस का विश्वास है कि किसी भी ज्ञान का महत्व उस ज्ञान से प्राप्ति होने वाली चीज़ों के महत्व पर आधारित होता है,और इस जैसी विशैषताओं वाली हस्ती से अधिक कोई भी प्राप्ति किया जाने वाला ज्ञान महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ नहीं है,और वह हस्ती अल्लाह तआला की हस्ती है जिस के प्यारे प्यारे नाम और प्रमुख विशेषतायें हैं,और ज्ञान का महत्व उस की आवश्यक्ता अनुसार होता है,और रूह को अपने पैदा करने वाले का ज्ञान,उस की मुहब्बत,उसे याद करना,अल्लाह को याद करेने से मिलने वाली खुशी,अल्लाह तआला से वसीला मांगने और उस के दरबार से निकटता प्राप्त करने से अधिक कभी किसी महान चीज़ की आवश्यक्ता नहीं होती है,और उस आवश्यक्ता को पूरा करने का केवल एक ही मार्ग है और वह मार्ग अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान है,बंदा जिस प्रकार अल्लाह

अल्लाह तआला की हस्ती,उस के नामों और उस की विशेषताओं के ज्ञान में दिल के सुधार और ईमान की पुर्ति है.

तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान रखता है उसी प्रकार अल्लाह तआला के विषय में जानकारी प्राप्त होती है,उसी प्रकार वह अल्लाह का इच्छुक रहता है, उस के निकट आता है,और बंदा जिस प्रकार उन नामों और उस की विशेषताओं को नकारता है उसी प्रकार वह अल्लाह की हस्ती से नावाकि़फ, उस को नापसंद करने वाला,और उस से दूर होगा,बंदा जिस प्रकार अपने दिल में अल्लाह तआला को जगह देता है उसी प्रकार अल्लाह तआला भी उस को अपने निकट जगह देता है।

चैथी बातः

अल्लाह तआला की हस्ती का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति अल्लाह के नामों और उस की विशेषताओं के विषय में जानकारी को अल्लाह तआला के संपूर्ण कार्यों और निर्णायकों के लिये सबूत बनाता है; क्योंकि अल्लाह तआला वही करता है जो उस के नामों और उस की विशेषताओं के अनुसार होते हैं और उस के कार्य हिक्मत,न्याय और एहसान पर आधारित होते हैं,और अल्ला तआला जो भी निर्णय लेते हैं वह उस की बड़ाई हिक्मत और एहसान अनुसार होते हैं,इसी लिये अल्लाह की ओर से आने वाली सभी बातें सत्य और सही हैं और उस की ओर से मिलने वाले सभी निर्णायक न्याय,हिक्मत और दया पर आधारित हैं,अल्लाह के नामों और उस की विशेषताओं का यह ज्ञान महान है और अधिक स्पष्ट होने के कारण इस पर चेतावनी की कोई आवश्यक्ता भी नहीं है।

पँाचवीं बातः

अल्लाह तआला की विशेषताओं और उन के नोदनों (तक़ाज़ों) में शामिल होने वाली सब ज़ाहिरी और छुपी इबादतों के बीच एक गहरा तअल्लुक़ है,क्यांेकि हर विशेषता के लिये एक विशेष बंदगी है जो उस के तक़ाज़ों में शुमार होती है,दिली तौर पर और शारीरिक तौर पर की जाने वाली संपूर्ण इबादतों में यह बात आम है; इस लिये जब बंदे को इस बात का विश्वास हो जाये कि केवल अल्लाह ही लाभ और हानि का मालिक है,वही देने और छीनने की क्षमता रखता है,वही जीविका देता है,वही पैदा करता है, वही मौत और जीवन का मालिक है,तो इस विश्वास से छुपे तौर पर बंदे के भीतर भरोसे की बंदगी पैदा होती है,और ज़ाहिरी तौर से अल्लाह पर भरोसे के प्रभाव ज़ाहिर होते हैं,बंदे का अल्लाह तआला के सुनने और देखने की शक्ति का ज्ञान रखना और इस बात का विश्वास रखना कि अल्लाह तआला से संसार की छोटी सी छोटी चीज़ भी छुपी नहीं है,वह हर ढकी छुपी चीज़ को जानता है,वह आंखों और सीनों में छुपी हुयी चीज़ों को जानता है,तो इस ज्ञान के कारण बंदे में हर उस चीज़ से बचने का जज़बा पैदा होता है जिस से अल्लाह तआला क्रोधित होता है,फिर वह अपने अंगों उन चीज़ों से जोड़े रखता है जो अल्लाह तआला को प्रसन्न करते हैं जिस कारण बंदे में छुपे तौर पर लज्जा की स्थिति (कैफियत) पैदा हो जाती है,और लज्जा बंदे को बुराइयों और हराम चीज़ों से दूर रखती है,जब बंदे को अल्लाह तआला की बेनियाज़ी,दानशीलता,पुरस्कार देने की क्षमता और उस की दया का ज्ञान होता है तो उस से बंदे की आशा बढ़ जाती है,इसी प्रकार जब बंदे को अल्लाह तआला के प्रताप,उस की महानता,उस के सम्मान का ज्ञान होता है तो इस से बंदे के भीतर नम्रता और विनम्रता और प्रेम आता है,फिर यह सब छुपी स्थितियां अपने अपने तक़ाज़ों के अनुसार बंदे में ज़ाहिरी बंदगी के अनेक तरीक़े पैदा करती हैं .. इस का तत्व यह निकला कि बंदगी का आधार अल्लाह तआला के नामांे और उस की विशेषताओं के तक़ाज़ों पर आधारित हैं।

छटवीं बातः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं की इबादत मंे दिलों और उस के स्वभाव एवं आचार की सुरक्षा है,जब कि इस का उलटा करने में अर्थात अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं को छोड़ देने में रूहानी बीमारियों का द्वार खोलना है।

सातवीं बातः

जब बंदा किसी मुसीबत, घृणित कामांे और कष्ट में पड़ जाता है तो अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान बंदे की सांत्वना का सामान बनता है,क्योंकि जब बंदे को इस बात पर विश्वास हो कि उस का रब अधिक जानने वाला,हिक्मत वाला,और न्याय करने वाला है जो किसी ऐसे व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं करता जो उस के निर्णय से प्रसन्न हो और धैर्य करने वाला हो और बंदे में यह यक़ीन हो कि उस को पहुंचने वाली सभी मुसीबतों और सब परीक्षाओं में अनेक रूचियाँ और लाभ हैं जिन का जानना उस के बस से बाहर

है,परन्तु अल्लाह तआला की हिक्मत और उस के ज्ञान का तक़ाज़ा यही है,तो इस विश्वास से बंदे को शांति मिलती है,अपने रब के निर्णय से वह प्रसन्न रहता है अपने सभी मामलों को अल्लाह के हवाले कर देता है।

आठवीं बातः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का समझना, अल्लाह तआला की मुहब्बत,उस की महानता,उस की हस्ती से आशा करने, उस से डरने, उस पर भरोसा करने,सदा उसे हाजि़र व नाजि़र समझने और इस के अतिरिक्त बहुत सी विशेषतायें बंदे में पैदा करने का कारण हैं जो अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं की ज्ञान के फल हैं।

नोंवीं बातः

निःसंदेह अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के अर्थ में विचार करना,अल्लाह तआला की किताब कुऱ्आन में विचार करने पर सहायक है; और अल्लाह तआला ने हमें अपने कु़रआन में विचार करने का आदेश दिया है,अल्लाह तआला ने फरमायाः {यह मुबारक किताब है जिसे हम ने आप की ओर इस लिये उतारा है कि लोग इस की आयतों पर ध्यान दें और ख्याल करें और अक़्लमंद इस से नसीहत हासिल करें“।}[सादः 29].

और चूंकि कु़रआने करीम में अधिकतर अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के विषय में उचित जगहों पर जि़क्र आया है, इस लिये उन नामों और विशेषताओं में विचार करने से कुरआने करीम के भीतर गौरो फिक्र करने का एक बड़ा द्वार खुल जाता है,जब आप कुऱ्आने करीम में विचार करेंगे तो कु़रआन आप को आसमानों के ऊपर अर्श पर बैठे हुये ऐसे बादशाह और क़ायम करने वाली हस्ती को देखेंगे जो अपने बंदों के मामलात चलाता है,उन्हें आदेश देता है और मना करता है,संदेष्टाओं को भेजता है,किताबें उतारता है,प्रसन्न होता है और क्रोधित भी,सवाब और अज़ाब देने की शक्ति रखता है,देता भी है और छीन भी लेता है,सम्मान देता है और ज़लील भी करता है,ऊँचा उठाता है और नीचे भी फेंक देता है,सातों आकाश के ऊपर से देखता और सुनता है हर ढकी और खुली चीज़ को जानता है,जो चाहता करता है,उस मंे हर विशेषता और हर प्रकार के गुण हैं,हर दोष से पाक है,कोई कण उस की अनुमति बिना हरकत नहीं करता,और कोई पत्ता भी नहीं गिरता मगर अल्लाह उसे जानता है,निःसंदह वह हस्ती अधिक ज्ञान और हिक्मत वाली है।

जिस ने अल्लाह तआला को पालिया उस ने क्या खोया?!और जिस ने अल्लाह को खो दिया उस ने क्या पाया?!

दस्वीं बातः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान दिल में अल्लाह तआला का अदब,सम्मान और उस से लज्जा करने पर उभारता है,अल्लाह तआला के अदब और सम्मान का अर्थ यह है कि उस के दीन पर जमने के साथ साथ अमल किया जाये,और ज़ाहिरी एवं छुपे तौर पर उस दीन के आदाब को बजा लाया जाये,और अल्लाह तआला का अदब एवं सम्मान तीन चीज़ों के बिना पैदा हो ही नहीं सकता हैः एक अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान हो,दूसरी चीज़ उस के दीन और शरीअत अथवा उस की प्रिय और अप्रिय चीज़ों का ज्ञान हो,तीसरी चीज़ ज्ञान और कर्म अनुसार तथा तुरंत सत्य को स्वीकारने वाला कोमल दिल हो।

ग्यारह्वीं बातः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान बंदे को अपने नफ्स की बुराइयों और उस में पायी जाने वाली कमी से खबरदार रखती है,फिर बंदा अपने नफ्स के सुधारने में जुट जाता है,याद रहे कि इन्कार और हटधर्मी के चार कारण हैंः घमंड,ईष्र्या,का्रेध और वासना(हविस)और चारों चीज़ों के पैदा होने का कारण बंदे की अपने रब से और स्वयं अपने आप से दूरी हो जाती है,और जब बंदा अपने रब की विशेषताओं की पूर्णता और उस के गुणांे की महानता को जान लेता है और अपने नफ्स में पाई जाने वाली कोताहियांे और बुराइयांे को पहचान लेता है फिर न तो वह घमंड करता है और न क्रोध और न ही अल्लाह तआला की ओर से अपने किसी भाई को मिली हुयी नेमत पर डाह करता है।

बारह्वीं बातः

बंदे का अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का न तो ज्ञान रखना और न ही उसे समझना और उन विशेषताओं की बुनियाद पर उस की बंदगी न करना गुमराही और जहालत का कारण

है,जिस व्यक्ति ने अल्लाह और उस के रसूल को न पहचाना उस ने फिर क्या जाना? जिस व्यक्ति को अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं की (वास्तविक्ता) हक़ीक़त का ज्ञान न हो तो उसे किस चीज़ की हक़ीक़त का ज्ञान होगा? और जिस व्यक्ति को अल्लाह तआला की हस्ती,उस की मरज़ी और चाहत अनुसार अमल,उस के दरबार के निकट करने वाले मार्गांे और अल्लाह तआला के दरबार तक पहुंचने के बाद उस को मिलने वाली नेमतों का ज्ञान न हो तो फिर उसे कौन से ज्ञान और अमल वाला समझा जायेगा? निःसंदेह मानव जीवन उस की रूह व दिल के जीवित होने पर निर्भर है,और दिल उसी समय जीवित रह सकता है जब उसे अपने पैदा करने वाले का ज्ञान और उस से प्रेम हो,उसी की इबादत में वह लगा हो,उसी के समीप विलाप करता हो,उसी की याद से उस को सुकून प्राप्त होता हो,और उसी की निकटता से उस को प्रेम हो,जिस व्यक्ति को इस जैसा जीवन प्राप्त न हो वास्तविकता मंे वह हर प्रकार की भलाई से वंचित (मह्रूम) है? चाहे उस के बदले दुनिया के संपूर्ण सुख उसे प्राप्त हो जायें।

तेरह्वीं बातः

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं का ज्ञान एकेश्वरवाद के विशुद्व करने और ईमान की पूर्णता का कारण है,इसी ज्ञान से दिल के कार्य जैसे निश्छलता,प्रेम,उम्मीद,डर और एक हस्ती पर भरोसा करने का जज़्बा पैदा होता है, अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के ज्ञान की ओर ध्यान,और उस में विचार एक छोटा सा कार्य है परन्तु दिलों को सुधारने और वस्वसों एवं आफतों से दिलों को पाक रखने में इस का बहुत बड़ा रोल है,जो व्यकित शरीअत के उसूल व ज़वाबित में विचार करेगा तो उसे यह ज्ञान हो जायेगा कि अंगों के कार्य दिलों के कार्य से जुड़े हुये हैं और अंगों के कार्य दिलों के कार्य के बिना लाभदायक नहीं हो सकते,अथवा उसे यह भी पता चल जायेगा कि अंगों के कार्य से अधिक महत्व दिलों के कार्यांे की है,क्या मोमिन और मुनाफिक़ के बीच केवल इसी बात से फर्क़ नहीं किया जाता है कि इन दोनों के दिलों में क्या क्या चीज़ें छुपी हुयी हैं,जो इन दोनों को एक दूसरे से अलग करते हैं? और क्या किसी भी मनुष्य के लिये अंगों के कार्य से पहले दिल के कार्य के ज़रिये इस्लाम में परवेश करने के अतिरिक्त कोई और मार्ग है? जो दिल की बंदगी से अधिक महान व महत्वपुर्ण और सदा बाक़ी रहने वाला है,और यही बंदगी अंगो से होने वाले कार्यांे का रास्ता है,इसी लिये दिल की बंदगी हर समय अनिवार्य है।

अल्लाह तआला के नामों और उस की विशेषताओं के समझने के विषय में नियम एवं चेतावनीः

अल्लाह तआला के ज्ञान मंे दिलों और जिस्मों का सुधार है।